Saturday , 18 November 2017

Home » खबर खास » दुष्यंत चौटाला के नाम खुला खत

दुष्यंत चौटाला के नाम खुला खत

उदय चे ने रोहतक बस छेड़खानी मामले में जिला अदालत फैसले के बाद मामले को लोकसभा में उठाने पर दुष्यंत के नाम लिखा खुला खत

March 15, 2017 10:10 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

माननीय दुष्यंत चौटाला,

हिसार लोक सभा सांसद, भारत सरकार।

आप हिसार से लोक सभा सांसद हो। भारत में युवा सांसदो में आपकी गिनती की जाती है। आप लोक सभा में समस्या उठाने में सक्रिय रहते हो। आपने हिसार की समस्याओं रेल, बिजली, पानी, पासपोर्ट आदि बहुत से मुद्दे उठाए हैं। अच्छा लगता है जब आपको ये जनता के मुद्दे उठाते देखता हूँ।

अभी कुछ समय पहले आपने लोक सभा में उन 2 लड़कों को सेना में नौकरी लगवाने का मामला उठाया था जो लड़के रोहतक बस में 2 बहनों के साथ छेड़खानी करने के आरोपी थे जिनको जिला अदालत ने पिछले ही दिनों बरी कर दिया।

इसलिए अब आपकी नजर में वो लड़के निर्दोष है। क्योकि उनको जिला अदालत ने बरी कर दिया है। वो नौकरी से वंचित हो गए थे। इसलिये आपने लोक सभा में मांग उठाई की उनको सेना नौकरी दे। इसके लिए आपने केन्द्रीय रक्षा मंत्री से भी मांग की।

देखा जाये तो आपका ये बहुत अच्छा कदम है और अगर वो निर्दोष है तो उनको काबिलियत के अनुसार नौकरी मिलनी भी चाहिए जिससे वो वंचित रह गए थे। मुझे भी बहुत ख़ुशी हुई की आप कोर्ट का सम्मान करते हुए संसद में आवाज उठा रहे हो।

  लेकिन उस समय बहुत ही दुःख होता है जब आपकी आवाज उन JBT उमीदवारों के लिए नही उठती जिनको आपकी पार्टी की सरकार के समय योग्य होते हुए भी नही लिया गया और अयोग्य लोगो को ले लिया गया था। क्यों कभी आपने लोक सभा में ये मुद्दा नही उठाया की JBT भर्ती घोटाले में सीबीआई कोर्ट का फैसला आ चुका है इसलिए अयोग्य व्यक्ति जो इंडियन नैशनल लोक दल (INLD) ने लगाए थे उनको हटाया जाए और जो योग्य रह गए थे उनको लगाया जाये। अगर आपने ये मुद्दा उठाया होता तो सच में मै आपको सलाम करता व पूरे देश में एक सार्थक संदेश जाता की पार्टी के बुजर्गो से हुई गलतियों को एक नौजवान नेता सुधार रहा है। लेकिन ये सब आप नही कर सके। शायद आप इस काम के लिए इतने मजबूत न हो। लेकिन कोई बात नही आप लोक सभा में ये सब नही कर सके। लेकिन आप बस इतना तो कर सकते ही थे की आप उन परिवारों से सार्वजनिक माफ़ी मांग लेते जिनको आपकी पार्टी ने योग्य होते हुए भी नौकरी से बाहर रखा। उनके बच्चों को ठोकरे खाने पर मजबूर किया। उन योग्य उमीदवारों का तो करियर ही खराब हो गया। समाज में ये सन्देश गया कि योग्यता हासिल करने की कोई जरूरत नही है बस किसी भी राजनितिक पार्टी से सैटिंग कर लो योग्यता आ जायेगी। योग्यता पर अयोग्यता की जीत

आप कोर्ट का इतना ही सम्मान करते हो तो क्यों आप आज तक ये मानने के लिए तैयार नही हो की पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला और पूर्व सांसद अजय चौटाला भी दोषी है। जिनको सीबीआई कोर्ट ने JBT भर्ती घोटाले में सजा सुनाई है।

आप और आपकी पार्टी कहते रहे है कि चौटाला साहेब को सजा राजनितिक साजिश के कारण हुई है। हरियाणा का सबसे बड़ा राजनितिक परिवार व हरियाणा के 4 से 5 बार मुख्यमंत्री रहे ओमप्रकाश चौटाला, 2 से 3 बार सांसद रहे अजय चौटाला के खिलाफ अगर साजिश हो सकती है तो एक छोटे से सरकारी कर्मचारी व जातीय अल्पसंख्यक की बेटियों की क्या औकात है। उनके खिलाफ तो सब कुछ हो सकता है और हुआ भी है।

शायद इन लड़कियों का पूरा मामला आपको न मालूम हो तो एक बार मै  दोबारा याद दिला देता हूँ।

दिनांक 28 नवम्बर 2014 को रोहतक बस स्टेंड से हरियाणा रोड़वेज की बस सोनीपत के लिए चलती है। रोहतक से 17 km बस चलने के बाद बस में 2 लड़कियों का 3 लड़को से झगड़ा होता है। लड़किया बैल्ट से लड़को को मारती है। लड़के उनको बस से नीचे फैंक देते है। इस लड़ाई में एक व्यक्ति बीच-बचाव भी कर रहा है। इस पूरे झगड़े की किसी ने वीडियो भी बना ली। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो जाती है और पूरे देश में मामला मीडिया के कारण छा जाता है।

सरकार लड़कियों को इनाम और आवार्ड देने की घोषणा कर देती है। अलग-अलग धार्मिक और सामाजिक संस्थाएं लड़कियों को अपने-अपने स्टेज से सम्मानित करती है।

लेकिन जैसे ही लड़को के पक्ष में कुछेक खाप पंचायतें आती हैं। वो हरियाणा सरकार पर दबाव डालती है। लड़की के पापा पर दबाव डालती हैं।

मामला यहाँ से यु टर्न लेता है। जो मिडिया, सरकार, धार्मिक, सामाजिक संस्थाएं इन लड़कियों को झांसी की रानी बता रही थी। वो एक दम पलटी मार जाती है।

लड़किया जहाँ इस मामले को छेड़खानी का मामला बता रही थी, वही लड़के इसको बुजर्ग महिला को सीट दिलाने का विवाद बताते है। लड़को के पक्ष में 4 गवाह आ जाते है। जो afidevt देते है कि वो बस में थे और ये सारा मामला सीट को लेकर था। ये चारों लोग SIT जाँच में झूठे निकलते हैं। जिनमे से एक महिला तो उस समय किसी गाँव में सरकारी ड्यूटी पर थी। उस महिला कर्मचारी ने लड़की के परिवार को लिखित में माफीनामा भी दिया है। इस लड़ाई में बीच-बचाव करने वाला व्यक्ति भी लड़कों के पक्ष में बयान देता है जबकि वो व्यक्ति पिछले बस स्टॉप से ही चढ़ा था।

इन सब को छोड़ भी दे तो सबसे बड़ा सवाल ये भी बनता है कि लड़कियां सीट पर बैठी है लड़के किसी बुजर्ग महिला को सीट दिलवाना चाहते है। लड़किया सीट से उठने से मना करती है। लेकिन लड़के अगले 20 मिनट तक इतनी बकवास करते है कि लड़कियों को जवाब देने पर मजबूर होना पड़ता है। अब सवाल ये है कि लड़के होते कौन है सीट दिलवाने वाले दूसरा इंसानियत के कारण सीट दिलवा रहे है तो क्या बस में किसी भी सीट पर लड़के नही बैठे थे या लड़कियों वाली सीट ही जरूरी थी। वीडियो में तो साफ दिखाई दे रहा है बहुत सी सीट्स पर लड़के बैठे है।

 लेकिन ये सीट विवाद था ही नही ये विवाद छेड़खानी का ही था, ये विवाद अपनी मर्दानगी दिखाने का था और ये कोई नया विवाद नही है हरियाणा के किसी भी गांव से शहर में आती बसों में, collages में, बस स्टैंड्स पर ये आम घटनाएं है।

आज हरियाणा की सबसे बड़ी समस्या ही लड़कियों के साथ बढ़ती छेड़खानी है। आज प्रत्येक माँ-बाप को ये चिंता सताती है कि लड़की पढ़ने के लिए, नोकरी के लिए गयी है सुरक्षित आएगी भी या नही आएगी। इस डर से कितने ही परिवार अपनी बेटियों को पढ़ाई के लिये शहर ही नही भेजते हैं। वही लड़किया भी छेड़खानी को सहन सिर्फ इसलिए करती रहती है की परिवार को बताया तो पढ़ाई छुड़वा देंगे। लेकिन लड़के इस मजबूरी का नाजायज फायदा उठाते हैं।

अब किसी ने इन मनचलों के खिलाफ, छेड़खानी के खिलाफ आवाज उठाई तो 150 खाप लड़कियों के विरोध में इकठ्ठा हो जाती है। इन लड़कियों के खिलाफ एडिट किये हुए पोर्न वीडियो बनाये जाते है, अश्लील गाने बनाये जाते है।

लेकिन हम प्रगतिशील लोग मजबूती से छेड़खानी के खिलाफ खड़े है।

 वही किसी भी अदालत का फैसला मान्य है लेकिन अदालत का फैसला आखिरी हो ऐसा नही होता। फैसला सुनाने वाली अदालत से ऊपरी अदालत में आपको फैसले के खिलाफ जाने का पूरा अधिकार होता है।

अदालत फैसला सबूतों और गवाहियों के आधार पर सुनाती है। जैसे सबूत पेश किये जायेंगे और जो गवाही दी जायेगी वैसा ही फैसला आएगा।

वैसे हिसार, हरियाणा और पूरे देश में ऐसे मामले भी बहुत है जिनको लोक सभा, विधान सभा में आप उठाये तो एक बहुत बड़े तबके को जो हजारो सालो से दबे-कुचले है उनको ख़ुशी होगी, अच्छा होता आप श्रम कानून, नरेगा, स्वामीनाथ आयोग की रिपोर्ट लागु हो, भगाना के उन दलितो के लिए आवाज उठाते जो पिछले 3 सालों से हिसार उपायुक्त कार्यालय पर दलित उत्पीड़न के खिलाफ धरना दिए हुए है, दलित उत्पीड़न के लिए पूरे देश में चर्चित मिर्चपुर, भगाना, डाबड़ा का मामला लोकसभा में उठाया जाना चाहिए जो आपकी लोकसभा क्षेत्र में आते है।

आप हवा के रूख को भांपकर बेशक इन लड़कों के पक्ष में पितृसत्ता के पक्ष में खड़े हों, लेकिन हम सभी प्रगतिशील लोग इन लड़कियों के पक्ष में मजबूती से खड़े हैं और अंतिम जीत हमारी ही होगी।

uday-che

लेखक परिचय

उदय चे स्वतंत्र लेखक हैं एवं सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता हैं। दलित एवं पीड़ितों के हक की आवाज़ के लिये अपने संगठन के माध्यम से उठाते रहते हैं। उदय चे हिसार के हांसी में रहते हैं।

 

 

नोट:- प्रस्तुत लेख में दिये गये विचार या जानकारियों की पुष्टि हरियाणा खास नहीं करता है। यह लेखक के अपने विचार हैं जिन्हें यहां ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है। लेख के किसी भी अंश के लिये हरियाणा खास उत्तरदायी नहीं है।

दुष्यंत चौटाला के नाम खुला खत Reviewed by on . माननीय दुष्यंत चौटाला, हिसार लोक सभा सांसद, भारत सरकार। आप हिसार से लोक सभा सांसद हो। भारत में युवा सांसदो में आपकी गिनती की जाती है। आप लोक सभा में समस्या उठान माननीय दुष्यंत चौटाला, हिसार लोक सभा सांसद, भारत सरकार। आप हिसार से लोक सभा सांसद हो। भारत में युवा सांसदो में आपकी गिनती की जाती है। आप लोक सभा में समस्या उठान Rating: 0

Leave a Comment

scroll to top