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OROP – रामकिशन ग्रेवाल की कुर्बानी और वीके सिंह की बदजुबानी

November 3, 2016 9:34 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

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जब देश में चारों और जय जवान के नारे लग रहे हों, सर्जिकल स्ट्राइक और सिमी के कथित आतंकवादियों को मौत के घाट उतारने के लिये सैनिकों व सुरक्षा बलों की बहादुरी का जश्न हर ओर मनाया जा रहा हो। जब सैनिकों के नाम पर जन के मन में उठ रहे सवालों को अपने मन में दबाकर रखने के आदेश दिये जा रहे हों ऐसे दौर में एक पूर्व सैनिक का आत्महत्या करना सवाल खड़े करता है। आत्महत्या के लिये सैनिक का मजबूर होना तो दुर्भाग्यपूर्ण है ही उससे भी दुर्भाग्यपूर्ण है सैनिक की मौत के बाद उसके परिजनों के साथ दिल्ली पुलिस ने जो बर्ताव किया।

मृत पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल के बेटे का कहना है कि पुलिस ने उनके व परिजनों के साथ मारपीट की। यहां तक कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी व दिल्ली के शिक्षामंत्री मनीष सिसौदिया को कानून व्यवस्था का हवाला देकर ग्रेवाल परिवार से मिलने तक नहीं दिया गया। दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल तक को धक्का-मुक्की का शिकार होना पड़ा।

रामकिशन ग्रेवाल ने क्यों की खुदकुशी

वन रैंक वन पेंशन यानि ओआरओपी की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहे पूर्व सैनिकों के प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे रामकिशन की हिम्मत सैनिकों का अपमान होते देखकर जवाब दे गई। मरने से पहले अपने परिवार के साथ हुई बातचीत में उन्होंनें अपना दुख प्रकट किया कि उन्हें कोई पूछने वाला नहीं है इसलिये वे अपने सैनिकों की मांग के लिये अपने प्राण निछावर कर रहे हैं। रामकिशन ग्रेवाल ने वित्त मंत्री के नाम भी एक ज्ञापन लिखा है जिसमें उन्होंनें वन रैंक वन पेंशन लागू करने की मांग की है।

मृत सैनिक रामकिशन ग्रेवाल की मानसिक स्थिति की जांच चाहते हैं वीके सिंह

अपनी बदजबानी के लिये मशहूर केंद्रीय राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह कभी पत्रकारों को प्रेस्टिट्यूट या प्रॉस्टिट्यूट बोलते हैं तो कभी दलितों की तुलना कुत्तों से करते हैं। ओआरओपी के लिये अपने प्राणों को न्योछावर करने का पूरा ज्ञापन लिखने के बाद पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल की आत्महत्या के लिये वीके सिंह चाहते हैं कि उनकी मानसिक स्थिति की जांच हो। वीके सिंह यहीं नहीं रूके बल्कि उन्होंनें वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) के मुद्दे पर कहा कि “कोई चार पैसे के लिये कहे कि एक साल बाद देनी है एक साल पहले देनी है उसमें नहीं पड़ना है।” वीके सिंह चूंकि इस तरह का बयान पहली बार नहीं दे रहे इसलिये यह अजीब तो नहीं लगता लेकिन कम से कम एक सेनानायक होने के नाते ही सही अपने सैनिक के प्रति थोड़ी हमदर्दी जता लेते तो अच्छा होता।

वन रैंक वन पेंशन

वन रैंक वन पेंशन का मुद्दा असल में है क्या इसकी स्थिति अभी किसी को सपष्ट रूप से मालूम नहीं है। कहने को तो सरकार ने पूर्व की सरकारो को कोसते हुए उनके 500 करोड़ के बजट को धत्ता बताते हुए 5000 करोड़ रुपये इसके लिये जारी करने के साथ अपनी पीठ थपथपाई है। वीके सिंह ही कहते हैं सरकार ने सैनिकों की चालीस साल पुरानी मांग मान ली है। एक हद तक वन रैंक वन पेंशन का मुद्दा शांत भी हो चुका था। लेकिन रामकिशन ग्रेवाल की आत्महत्या ने सर्जिकल स्ट्राइक और भोपाल मुठभेड़ को पिछे छोड़ते हुए ओआरओपी को फिर से ट्रैंडिंग में ला दिया है।

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