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Paush Maas – पोह जाड्डै का छोह माह जाड्डा जा

December 20, 2016 9:48 am by: Category: साहित्य खास 1 Comment A+ / A-

paush-maas

हरियाणा मैं मंगसर, पोह अर माह का टेम जाड्डै का मान्या जा है। अर जाड्डै तै जुड़ी हरियाणवी कहावत लोकप्रिय हैं तो पढ़ों बड़े बुजूर्गां की विरासत हरियाणा खास पै।

पोह यानि पौष का मास कसूती ठंड तै जाण्या जा है। हालांकि पुराणे बख्तां मैं मंगसर तै जाड्डै की ठीक ठाक शुरुआत मानी जा है कह्या भी करदे लोग के मंगसर जाड्डा ढंगसर पर पोह मैं तो जमां जाड्डै के रिकार्ड टूटण लाग ज्यां हैं, कान सीळे, हाथ पां सुन्न, मतलब आपणे बडे बडेरे न्यूवे थोड़े कह कै गये हैं के पोह जाड्डै का छोह।

जाड्डै गेल वर्ग संघर्ष भी जुड्या होड़ है। कह्या करैं जाड्डा तो अमीरां का होवै है गरीबां नै गरमी आच्छी। असल मैं जाड्डा रोकण खातर गरम कपड़े, गरम बिस्तरे, अर स्यर लकोण नै छात भी पर देश की आबादी मैं इसे ब्होत से लोग इब बी सैं जिनकी पोंहच इन चीजां तक नहीं है। इसा नहीं है के वे लोग काम ना करदे हों, दिन-रात हाड तुडायां पाच्छै रोटी नसीब हो ज्यो या ए बड़ी बात होज्या सै। म्हारै बरग्यां नै खबर मैं ए बेरा लागैगा के जाड्डा लागण तै फलाणी जगां पै फलाणै की मौत होगी अरै मौत जाड्डा लागण तै थोड़े होई है मौत होवै जाड्डा रोकण का कोये जुगाड़ ना होण तै.. जड़ै सारै देश की कमाई कुछ गिणे चुणे लोगां मैं जांदी हो ओड़ै इसे हालात तो बणैंएगे। बेसक दिखाण नै अर सुणान नै नारे सबकै साथ अर सबकै विकास के लागदे हों। खैर जाड्डै कै कूकळ उठदें सारे बुकळ मारण लागज्यां (जाड्डै कै उठी कूकळ सबनै मारी बूकळ) हैं अर हीणै यानि के गरीब माणस जिसकी सारै मर हो सै उसनै भी जाड्डा रूवा-रूवा कै मारण के दावे ठोकण लाग ज्या है ज्यांए तै बड़े बडेरे कह गे हैं के

ठाड्ढे की माळा जपूं, सारे कारज सारूं।

अर हीणे की याह्ता करूं रूवा रूवा कै मारूं।।

सिर्फ अमीर गरीब नी उम्र कै पड़ाव पै भी जाड्डा असर करै है बाळक चूंकि भगवान का रूप मान्या जा है तो भगवान कै लोवै कूण लागै अर जवानी इसी अवस्था बताई जा सै के जवानी मैं माणस पत्थर पाड़ दे पर बूढ़ापा तो सबका बैरी होवै है ना ज्यांए तै इस जाड्डै की पार भी बुढ़ापै पै बसावै है अर कह्या जा सै के

बाळक कै तो लागूं कोनी, जवान का मैं भाई।

बूढ़ै ठेरै नै छोडूं कोनी, चाहे ओढ़ल्यो रजाई।।

बाकि कोये कितणा जवान हो भाईचारै कै चक्कर मैं ना रहियो ब्याह के सारे गीत साचे भी नी होंदे क्योंकि कह्या न्यूं भी गया है के पोह म्हं सीह (शेर) के बी कान हाल्लैं। असल मैं जाड्डा तो ज्यब पहाडां मैं बर्फ पड़न लागज्या अर ओड़ तै चाली वा सीळी बाळ जिसनै सीड़ भी कहदें हैं उरै मैदानी इलाक्यां मैं खासकर आपणै उत्तरी भारत मैं आवै तो सबके कान खड़े हो ज्यां हैं। देखी भी होगी इस राम जी की माया कई बै तो सामण भी नमूनिया करण पै तुल ज्या है। ज्यांए तै कह्या करदे बड़े बडेरे के पोह का ना माह का जाड्डा सीळी बाळ का।

अर पोह कै म्हीनै मैं पड़न आलै सूकै जाड्डै तै पाळै तै आपणा बचाव तो करणा ए चहिये साथ मैं डांगर-डोर का भी खास ध्यान इस मौसम मैं राखणा चाहिये हालांकि इस टेम पै पड़ण आली धूंध अर जाड्डा फसलां खातर तो संजीवनी का काम करै है पर डांगर-ढोर की स्यात चढ़ ज्या है। इन्हें अनुभवां तै या बात लिकड़ी लागै है के पोह-माह पड़ै डांगर मरै, अर फाग्गण पड़ै कोठी भरै यानि जाड्डा जै फागण तक सागी रह्वै तो फसल आच्छी होण की उम्मीद बंध ज्या सै। हालांकि माह कै आंदे जाड्डै कै जाण की लाग ज्या है सुणे होंगे थामनै बडेरे या कंहदे भी के माह जाड्डा जा। ज्योतिष आळी भी बात कही जा सैं या जरुर किसे स्याणै बाह्मण की कही होड़ पावैगी के धनु पंदरा, मकर पच्चीस, सकरांत का जो त्यौहार आया करै उसनै मकर संक्रांति बोल्यां करैं ज्योतसी कह्या करैं के इस दिन सूरज मकर राशि मैं बड़्या करै। सकरांत तै पंद्रहा दिन पहले अर पच्चीस दिन पाच्छै ये दिन जमां करड़ै जाड्डै के बताये इसकै बाद तो जाड्डा नरम पड़ ज्या करै। बाकि जाड्डा तारण का देसी इलाज़ पहलां तो देसी नाज़ होया करदा गामां मैं तो इब भी बाजरै की रोटी, खिचड़ी देखण नै मिल ए जा सै पर इब खाणा बणान तांहि इतणी खूबात नी करी जांदी अर ना वैं पहलां आळे देसी नाज़ हे रह हे जिनके खदड़के उछळ उछळ कै लाग्या करते खैर के करया जा सकै है बख्त गेळ बोह्त सी चीज़ बदल ज्यां है इब तो बडेरयां की कही ये कहबत रह री हैं के

जाड्डा लाग्गै पाळा लाग्गै, खिचड़ी नुवाई,       

सेर सीत घाल कै लप-लप खाई

(लेख में जिन कहावतों का जिक्र है वे राजकिशन नैन जी के दैनिक ट्रिब्यून में छपे लेख से साभार ली गई हैं। जिन्हें हरियाणा खास की खास शैली में प्रस्तुत किया है जगदीप सिंह ने अगर लेख पसंद आये तो दोस्तों के साथ शेयर जरुर करें)

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Comments (1)

  • Dharmveer

    राजकिशन नैन जी हरियाणा के जीवंत सांस्कृतिक समर्थता का प्रतीक है उनके विचारों को नए अंदाज में प्रस्तुत करने के लिए हरियाणा खास का धन्यवाद

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