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PGI ROHTAK – पहले मेडिकल ठेके पै फेर हरियाणा अर देश !

December 8, 2016 9:30 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

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मैडीकल नै आजकाल पी जी आई कहवण लागगे। न्यों कहवैं सैं अक सरकार नै इसका औधा बधा दिया। बाकी सब किमै न्यों का न्यों तै नाम बदलण की बी के जरूरत थी। हरियाणे का इकलौता मैडीकल पर अखबारां आले इसके पाछै पड़े रहवैं सैं। आजकाल मैडीकल आल्यां कै एक धुन और सवार होई सै। या धुन आई तै वर्ल्ड बैंक धोरे तै चाल कै सै पर आड़े के कार मुख्त्यार इसनै निखालस अपणे दिमाग की उपज बतावैं सैं। सुद्ध हरियाणवी अर और बी सही कही जा तै सही रोहतकी। या धुन सै सब किमै ठेके पै देवण की। पहलम कैन्टीनां का ठेका उठ्या करता, स्कूटर स्टैंड का ठेका उठता देख्या फेर इबतै ठेक्यां का कोए औड़ै कोण्या रह्या।

                मैडीकल कालेज मैं रहणियां की सबकी सारी हाण घिग्घी बन्धी रहवै सै। कदे इस डाक्टर कै घरां चोरी तै कदै उस डाक्टर के घरां चोरी। कदे स्कूटर की चोरी तै कदे कार की चोरी की सीनाजोरी। अस्पताल मैं वार्डां मैं मरीजां के रिश्तेदारां की सामत आई रहवै सै रोज, ओ पी डी मैं बीमारी की मार फेर ऊपर तै भीड़ की लाइन की मार अर सोने पै सुहागा यो अक पाकेट मारां की मार। डाक्टर मरीजां पै वार करैं अर जेब कतरे मरीजां अर डाक्टरां दोनूआं पै दया दृष्टि राखैं सैं अपनी। चोरी की बी देखी जा माणस और मेहनत करकै कमा ले।

                आजकाल एक साक्का और बधग्या। महिला चाहे डाक्टर हो चाहे नर्स हो, चाहे स्वीपर हो अर चाहे मरीज हो अर चाहे पढ़ण आली हो, उसकी गेल्यां बहोतै भुण्डी बणै सै। राह चालदी औरतां नै छोरियां नै छेड़ना बधता जावण लागरया सै। बदमासां के टोल के टोल हांडे जावैं सैं। कोए रोक टोक ना। कई डाक्टर अर नर्स बतावैं सैं अक कई बर तो ड्यूटी पै उनकी गेल्यां बहोतै भुण्डी बणै सै। कई महिला मरीजां अर उसकी रिस्तेदार देखभाल करण आली औरतां की मजबूरी का फायदा ठावन्ते लोग वार नहीं लावन्ते। लेडी डाक्टर अर नर्सां के छात्रावासां मैं भी असामाजिक तत्वां की घुसपैठ दिन पै दिन बधती जावण लागरी सैं। सुरक्षा के प्रबन्ध बहोतै ढीले बताये अर पुलिस चौकी (मैडीकल आली) पै तै दिन छिपे पाछै सोमरस का भोग लाकै घणखरे पुलिस आले राम की भक्ति मैं लीन हुए पावैं सैं। कई बै ये सवाल उठे अर आखिर मैं प्रशासन के समझ मैं आगी अक मैडीकल की सुरक्षा का काम ठेके पै दे दिया जा तो चोरी जारी अर बदमाशी पै कंट्रोल कर्या जा सकै सै। देखियो कदे जिन ताहिं ठेका दिया जा वोहे चोहदी के बदमाश लिकड़याए तै के मण बीघै उतरैगी?

                कई बै जिब मरीज धोई औड़ बैड सीट मांगले कै ड्राई क्लीन कर्या औड़ साफ काम्बल मांगले तै उसनै नहीं मिल सकता चाहे मंत्री ताहिं की सिफारिस करवा कै देख ले। अर मंत्री बी उस एक मरीज की खातर तै टैलीफोन कर देगा फेर बाकी भी तै मरीज सैं इस मैडीकल मैं उनकी चिन्ता ना मन्त्रियां अर ना मुख्यमंत्री जी नै। जड़ बात या सै अक साफ बैड सीट का जिकरा चालै तै लाण्ड्री का जिकरा चाल पड़ै अर इसकी मसीन 30 साल पुरानी, बदलै कूण? तै प्रशासन मैं बैठे लोग फेर न्यों कैहदें सैं अक कपड़यां की धुलाई का काम भी ठेके पै देण की प्लान बणन लागरी सै।

                वार्डां की सफाई का मसला हो चाहे बाथरूमां की सफाई का मसला हो अर चाहे प्रेशन तै पहलम मरीज के बालां की सफाई का मसला हो, इन सारे कामां खातर ठेकेदारी प्रथा की वकालत करणिया बहोत पैदा होगे हरियाणा मैं। तै फेर तै सारा ए मैडीकल ठेके पै छुटा दिया जा। सरकार का 32 करोड़ का बजट बच ज्यागा अर 30-40 करोड़ रुपइये मैं इसका ठेका उठैगा। इसी तंगी के बख्तां मैं सरकार ने 72 करोड़ का फायदा हो सकै सै इस दवाई तै। ठेके पै काम तै डाक्टरां की ‘स्टीराइड’ आली रामबाण दवाई सै बेरा ना इब ताहिं सरकार की समझ मैं क्यों नहीं आली ?

                जनता का के होगा? इसकी परवाह ना सरकार नै सै अर ना खुद जनता नै सै। अर जै न्यों ए चालता रहया तै पहलम तै पूरा मैडीकल ठेके पै ठवाया जागा। फेर न्यों ए एक पूरा जिला ठेके पै चलावण की बात बी चाल सकै सै अर फेर पूरा हरियाणा अर फेर कदे पूरा भारत देश ठेके पै जावैगा।

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लेखक परिचय

डॉ. रणबीर सिंह दहिया पीजीआई रोहतक के सेवानिवृत सर्जन हैं और हरियाणवी साहित्य व समाज की गहरी समझ रखते हैं…. फौजी मेहर के गांव बरौणा में पैदा हुए डॉ. दहिया उनकी विरासत को रागनी लेखन के जरिये आगे बढ़ा रहे हैं। वर्तमान में भी निशुल्क ओपीडी की सेवाएं जरुरत मंद लोगों के लिये देते हैं और समाज के प्रति समर्पित एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता की भूमिका अदा कर रहे हैं।

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