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प्रो कब्बड्डी से पाई गांव को मिल रही नई पहचान

पढ़ोगे लिखोगे तो बनोगे नवाब खेलोगे कूदोगे होंगे खराब एक झूठी कहावत

July 26, 2017 12:37 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

प्रतीकात्मक चित्र – स्पोर्ट्समंच डॉट कॉम से साभार

एक समय था जब लोग कहा करते थे कि पढ़ोगे लिखोगे तो बनोगे नवाब खेलोगे कूदोगे तो होगे खराब लेकिन अब समय का पासा पलट चुका है। पढ़ने के साथ-साथ खेल कूद भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उस पर परंपरागत खेलों को व्यावसायिक बना दिये जाने से इन खेलों का संरक्षण तो हो ही रहा है साथ ही युवाओं को भी एक सही दिशा मिल रही है। प्रो कब्बड्डी लीग इसका एक सफल और जीता जागता उदाहरण है।

28 से शुरु हो रहा है प्रो कब्बडी का पांचवा दंगल

28 जुलाई से प्रो कब्बड्डी लीग के तहत विभिन्न टीम एक दूसरे से पांचवी बार पंगा लेने को तैयार हैं। पिछली बार के मुकाबले इस बार की प्रतिस्पर्धा और भी कड़ी होने वाली है क्योंकि इस बार मैदान में 8 नहीं बल्कि 12 टीम उतरने वाली हैं। कबड्डी का खेल हो और दूध दही का खाना वाले हरियाणा का नाम न लिया जाये तो ऐसा कैसे हो सकता है। जी हां पीकेएल यानि प्रो कबड्डी लीग की शुरुआत से सबसे ज्यादा लाभ हरियाणा के युवाओं को हुआ है। आज लगभग हर टीम में हरियाणा का कोई न कोई खिलाड़ी खेल रहा है। कुछ प्रमुख टीम्स का तो नेतृत्व भी हरियाणवी खिलाड़ियों के हाथ में है। गुड़गांव के अनूप कुमार, झज्जर के मन्जीत छिल्लर, सोनीपत के नरवाल ब्रदर्स और भी बहुत सारे नाम लिये जा सकते हैं जिन्होंने लीग के ले पंगा वाले स्लोगन को चरितार्थ किया है। वैसे तो कबड्डी की नर्सरी हरियाणा और दिल्ली की सीमा से सटे बहादुर के नजदीक स्थित गांव निजामपुर को कहा जा सकता है लेकिन हरियाणा के कैथल जिले का भी एक गांव हैं जहां से हर साल प्रो कबड्डी लीग में खिलाड़ियों को मौका मिलता है यह गांव है पाई।

पाई गांव से खेल रहे हैं तीन खिलाड़ी

प्रो कब्बड्डी लीग के पांचवे सीज़न में कैथल के गाँव पाई से तीन खिलाड़ी खेल रहे हैं। हालांकि हर सीजन में इस गाँव से 5 से 7 खिलाड़ी खेलते हैं लेकिन अबकी बार चोटिल होने की वजह से कुछ का चयन नही हो पाया। वहीं अगर पूरे कैथल जिले की बात की जाये तो पाई गांव के तीन खिलाड़ियों सहित कुल चार खिलाड़ी कब्बड्डी के दंगल में भाग ले रहे हैं।

अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के कब्बड्डी खिलाड़ियों का गांव है पाई

जिला कैथल के इस गाँव में कब्बड्डी को विशेष स्थान दिया जाता है। यहां के खिलाड़ी राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपना लोहा मनवा चुके हैं। गाँव में बच्चे से लेकर बड़े बुजूर्गों तक में कब्बड्डी के प्रति समर्पण की भावना देखी जा सकती है। गाँव के युवाओं और बच्चों को सुबह-शाम कब्बड्डी के लिए ग्राउंड में मेहनत करते हुए देखा जा सकता है। खिलाड़ियों का कहना है कि हमें गर्व है कब्बड्डी पर और इस गाँव पर जिसकी मिट्टी में खेलकर हम इतनी ऊंचाई तक पहुंचे।

पहली बार हरियाणा लेगा प्रो कब्बड्डी में पंगा

यू मुंबा, पुनेरी पलटन पिंक पैंथर ये नाम तो आपने पहले भी सुने होंगे लेकिन इस बार प्रो कब्बड्डी में हरियाणा का नाम भी सुनाई देगा। क्योंकि नई चार टीम्स में एक टीम हरियाणा की भी है। इस टीम में पाई गांव के ही कुलदीप का चयन हुआ है। उन्होंने बताया कि प्रो-कब्बड्डी आने से खिलाड़ियों को बहुत बड़ा प्लेटफार्म मिला है। इससे कब्बड्डी जल्द ही ओलम्पिक में भी देखने को मिल सकती है। उन्हें उम्मीद है कि वे अपनी और से अच्छा प्रदर्शन करने का प्रयास करेंगें।

पाई के मनोज का तीसरा सीज़न 

वहीं मनोज प्रो कब्बडी में अपना तीसरा सीज़न खेलेंगे। उन्होंने बताया कि यहां के खिलाड़ियों के खून में कब्बड्डी बसी है। हमारे गाँव के बहुत से खिलाड़ी बड़ी-बड़ी प्रतियोगिताओं में खेले है और गाँव का नाम रोशंन किया है। इन्हीं बड़े भाइयों को देखकर हमने भी खेलना शुरू किया और आज इस मुकाम पर पहुंचकर गौरव महसूस कर रहे हैं।

अब कोई नहीं कहता खेलेगो कूदोगे तो होगे खराब 

पहले कहा जाता था कि पढ़ोगे लिखोगे तो बनोगे नवाब खेलोगे कूदोगे तो होगे खराब लेकिन वक्त से साथ बदलते दौर में ये कहावतें भी बदलने लगी हैं। बल्कि हरियाणा में तो खिलाड़ियों पर अब विशेष रूप से ध्यान दिया जाने लगा है। कहीं कुश्ती के पहलवान तैयार हो रहे हैं तो कहीं बॉक्सिंग का क्यूबा नज़र आता है। अब प्रो कब्बड्डी ने हरियाणा के युवाओं में एक नई उम्मीद जगा दी है। इतना ही नहीं पाई गांव में तो लड़कियां भी लड़को से पीछे नही है और अपने बड़े भाइयों की तरह सिर्फ डेढ़ साल की मेहनत के बाद कब्बड्डी में अच्छा नाम कमा रही है। अब लड़कियों का भी अगला टारगेट प्रो-कब्बड्डी में खेलना है।

ग्रामीणों का सहयोग भी है खिलाड़ियों के निखरने की वजह

ग्रामीणों का भी खिलाड़ियों को पूरा सहयोग मिलता है। गाँव की पंचायत ने लड़को और लड़कियों के लिए जिम व खेल के सामान की व्यवस्था की है। स्कूल स्तर से ही खिलाड़ी गाँव का नाम रोशन करते है और आगे चलकर प्रो-कब्बडी जैसे बड़े फॉर्मेट में अपनी भागीदारी साबित करते हैं।

कैथल से विरेंद्र पुरी की रिपोर्ट से साभार

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