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सावन का फल है “पूंडरी की फिरनी”

पूंडरी के पानी में छिपा है फिरनी के स्वाद का राज

July 18, 2016 9:26 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

-विरेंद्र पुरी

सावन का महीना आते ही हमारे मुंह में कुछ खास मिठाइयों को लेकर पानी आ जाता है। घेवर और फिरनी यह दो ऐसी मिठाइयां है जिनके लिये लोग साल भर सावन महीने का इंतजार करते हैं। जैसे हांसी के पेड़े, गोहाना के जलेब और रोहतक की रेवड़ी जगत प्रसिद्ध है उसी तरह प्रसिद्ध है सावन के फल के नाम से मशहूर पूंडरी की फिरनी।

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“पूंडरी की मशहूर फिरनी” यही वो स्लोगन है जिसको लगाकर पुरे हरियाणा के शहरों में दूकानदार इस मिठाई को बेचते हैं। सावन के महीने में लोगों को पूंडरी का नाम लेने भर से ही फिरनी का स्वाद याद आने लगता है।

 

पूंडरी हरियाणा के कैथल जिले का एक छोटा सा कस्बा है। यहां की बनी एक मिठाई हरियाणा तो क्या बल्कि पूरे भारत में मशहूर है, जिसका नाम है फिरनी। ये मैदे और घी से बनी एक ऐसी मिठाई है जो की सिर्फ पूंडरी में ही बनती है और पूरे हरियाणा समेत अनेक जगहों पर सप्लाई की जाती है। सावन का महीना आने से लगभग 1 महीना पहले ही यहां के कारीगर फिरनी बनाना शुरू क्र देते हैं। बड़ी लंबी और कड़ी मेहनत करके कारीगर इसको तैयार करते हैं। कारीगर की मेहनत और लगन ही है जिसने इस मिठाई को इतना मशहूर क्र दिया हैं। सावन के महीने में इस मिठाई के बड़े बड़े स्टाल और गोदाम देखने को मिल सकते हैं।सावन का महीना लगते ही यहां के स्थानीय लोगो के रिश्तेदारों के फोन आने लग जाते है मिठाई मंगवाने के लिए। कैथल, करनाल ,जींद, पानीपत आदि शहरों में दुकानों पर पूंडरी की मशहूर फिरनी के बैनर लगे देखे जा सकते हैं, जो की यहां से ले जाकर फिरनी बेचते है।

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45 वर्षों से बनाई जा रही है फिरनी

 

कहा जाता है की लगभग 45 वर्षों से यहां के कारीगर फिरनी बना रहे हैं। शुरू में एक-दो दुकानों से ही ये मिठाई बननी शरू हुई थी लेकिन अब यहां पर सैकड़ों दुकाने हैं जो फिरनी को तैयार करते है। बताया जाता है की यहां जैसी फिरनी कही भी नही बनती। कारीगरों का कहना है की यहां के पानी में वो बात है जो इस मिठाई को ख़ास बनाती है। कुछ कारीगरों का तो यहाँ तक कहना है की ये वरदान ही है जो ऐसी मिठाई सिर्फ पूंडरी में ही बनती है कही और नही। जब स्थानीय लोगो और खरीददारों से बात की गई तो उन्होंने बताया की ये मिठाई वो अपने सभी रिश्तेदारों को पुरे भारत में भेजते हैं। कुछ ने तो विदेशों में भी भेजने की बात कही। इसको यहाँ सावन के फल के नाम से भी जाना जाता है। सावन का यह फल सावन के मौसम में खूब अच्छे से फल-फूल कर लोगों को एक अद्भुत स्वाद की अनुभूति कराता रहता है।

 

 

यहां के कारीगरों का कहना है कि यहां की फिरनी का छोटा साईज और मुलायमपन है जो इसे अन्य शहरों की फिरनी से इसे अलग करती है। यहाँ की फिरनी में वो अद्भुत स्वाद है जो खाने वालों को बार बार अपनी और आकर्षित करती है।

 

 

ग्राहकों और स्थानीय निवासियो ने बताया की यहां की फिरनी के चर्चे तो विदेशों तक हैं। जब भी सावन का महीना आता है तो भारत की अन्य जगहों से ही नही विदेशों से भी उनके रिश्तेदारों के फोन आने लगते हैं पूंडरी की फिरनी के लिए।

 

 

अन्य शहरों जैसे कैथल, करनाल, पानीपत, यमुनानगर, जींद आदि से आये व्यापारी जो पूंडरी से फिरनी ले जाकर बेचते हैं उनका भी ये कहना है की उनके शहर के ग्राहकों को भी सिर्फ पूंडरी की फिरनी ही चाहिए। सावन की बस यही एक मिठाई है जिस पर लोगों की नजरें आकर टिक जाती है।

(पूंडरी से संवाददाता विरेंद्र पुरी की रिपोर्ट)

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