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हे राजन!

आरबीआई के 23वें गवर्नर हैं डॉ. रघुराम राजन

June 22, 2016 1:38 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

R Rajan

 

बयान एक – भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन को दूसरा मौका नहीं देना चाहिये,

बयान दो- रघुराम राजन विदेशी ऐजेंट हैं

बयान तीन ( सत्ता पक्ष) – शसससससससस- घोर चुप्पी

बयान चार- मुझे दूसरा कार्यकाल नहीं चाहिये अपना कार्यकाल समाप्त होते ही मैं अपने अकादमिक क्षेत्र में लौट जाऊंगा।

बयान पांच- सरकार जल्द ही रघुराम राजन के उत्तराधिकारी की घोषणा करेगी।

बयान छह- यह सरकार रघुराम राजन के योग्य नहीं है।

बयान छह- राजनीति का शिकार हुए हैं राजन।

अब आगे…….

हे राजन तुम नहीं होते तो ढह जाती यह अर्थव्यवस्था, तुम्हीं तो थे जिसने दूर से ही भांप लिया था मंदी को। तुम्हीं ने किया भारत में उसे बेअसर। ऐसा क्या हुआ राजन कि तुम दोबारा से अपने इस पद पर बने नहीं रहना चाहते। क्या कोई भी तुम्हारे बारे में कुछ भी कहने लगता है। नहीं राजन आपको गलत फहमी हुई है। उनके तो नाम में ही स्वामी है उनकी ज्यादा ख्वाहिशे नहीं है वे तो किसी न किसी के बारे में आये दिन कहते ही रहते हैं। उनके लिये तो तुम बयान जारी करने का जरिया मात्र हो। क्या कहा पीएम, एफएम चुप रहे। नहीं राजन देखो एफएम ने तुम्हारे जाने की सब तैयारियां कर ली हैं। वे जल्द ही तुम्हारे उत्तराधिकारी की घोषणा कर देंगें। क्या कह रहे हो राजन तुम्हें इसका पहले से पता था इसलिये तुमने स्वंय ही जाने का

निर्णय लिया। कोई बात नहीं राजन देखो तुम्हारी सुखद विदाई के लिये वे तुम्हारी इच्छा पूरी कर रहे हैं। वे अपने बयानों अपने वादों को धत्ता बताते हुए उनसे 100 फीसदी मुकरे हैं और 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दे दी है। तुम भी तो यही चाहते थे न राजन। अब तुम्हारे विदेशी व्यवसायी दोस्त नाराज नहीं होंगे। क्या कहा यह तुम्हारे लिये और भी निराशाजनक है क्यों भला? ओह अब तुम्हें अपने विदेशी व्यवसायी दोस्तों की सांत्वना भी नहीं मिलेगी। कोई बात नहीं राजन तुम जाओ अपने शिकागो विश्वविद्यालय यहां तुम्हारे लिये अब रखा ही क्या है।

 

रघुराम राजन – संक्षिप्त परिचय

3 फरवरी 1963 को भोपाल में जन्में रघुराम राजन की गिनती अर्थशास्त्र की अच्छी समझ रखने वाले विद्वानों में की जाती है। आरबीआई गवर्नर के रूप में मुद्रास्फिति को नियंत्रित करना, रूपये की कीमत को संभालना और विकासदर को पटरी लाना उनकी उपलब्धि माना जा रहा है लेकिन उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि जिसके कारण उनका विरोध किया जा रहा है वह है नॉन परफोर्मिंग एस्सैट यानि (एनपीए) को सामने लाना। एनपीए में वे लोग आते हैं जिन्होंने बैंको से कर्ज तो लिया लेकिन उसका भुगतान नहीं कर रहे उदाहरण के तौर पर विजय माल्या जैसे व्यवसायी। इसी कारण उद्योगपतियों का एक बड़ा खेमा उनके खिलाफ हो रहा था। आशंका जताई जा रही है कि स्वामी जैसे नेता इन्हीं की आवाज़ हैं। स्वामी कभी उन्हें विदेशी ऐजेंट तो कभी कांग्रेस ऐजेंट कहकर मीडिया में सुर्खियां बटोर रहे हैं। तो विपक्षी पार्टियां राजन के बहाने एक बार फिर सरकार पर निशाना साध रही हैं। कुछ उद्योगपति भी राजन के समर्थन में आये हैं और राजन के जाने को देश की अर्थव्यवस्था के लिये नुक्सानदायक बता रहे हैं।

डॉ. रघुराम राजन 2008 की आर्थिक मंदी के भविष्यवक्ता रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रमुख अर्थशास्त्री भी राजन रहे हैं। डी सुब्बाराव के बाद आरबीआई के 23वें गवर्नर के रुप में उनका कार्यकाल अब 4 सितंबर 2016 को समाप्त हो रहा है।

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