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राजनीति का रथ हांको रे भैया, ढूंढो कोई मुद्दा

November 7, 2016 9:54 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

rajrath

पुराने जमाने में रथ कैसे होते होंगे, यह तो इतिहास विशेषज्ञ ही बता सकते हैं पर राजनीति के रथ कैसे होते हैं, यह तो हर चुनाव में देखने को मिल ही जाते हैं। हाई टेक्नीक और पूरी सुविधायओं से लैस मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के रथ को समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेता जी मुलायम सिंह यादव ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। चाचा और पार्टी अध्यक्ष शिवपाल यादव भी नेताजी के कहने पर परिवार और पार्टी की एकता का प्रदर्शन करने में सफल रहे। हालांकि चाचा ने मुख्यमंत्री ही कहा तो भतीजे ने प्रदेशाध्यक्ष ही कहा। एक-दूसरे का नाम न दिल से, न मुंह से निकला। पांच नवंबर के रजत जयंती समारोह का न्यौता भी दिया, जिसमें सीएम अखिलेश भी शामिल होंगे। इससे पहले सैफई गांव में चाचा-भतीजा दीपावली पर अलग-अलग पहुंचे। दीपावली पर भी दिलों में दीये नहीं जल पाए। फिर भी रथयात्रा की शुरूआत पर न तो रामगोपाल यादव नजर आए, न ही आजम खां। रथ हांकने वाले कम क्यों होते जा रहे हैं, कैसे यूपी भर में रथ हांका जाएगा? इससे पहले यूपी के लोगों ने कांग्रेस की बस-यात्रा और खाट-सभाओं के साथ किसान यात्रा करते उपाध्यक्ष राहुल गांधी को देखा लोगों ने। 

 

यूपी में राजनीति का रथ चला तो हरियाणा के भिवानी के बामला गांव में आत्महत्या करने वाले पूर्व सैनिक रामकिशन की अंतिम संस्कार यात्रा संपन्न हुई। अपने बेटे से फोन पर आखिरी बातचीत में वन रेंक, वन पेंशन के मुद्दे को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरने पर जाते समय बता दिया कि उसूलों के चलते, अपने फौजी भाइयों से हो रहे अन्याय के चलते सल्फास की दो-तीन गोली खा लेने की बात बता दी, जिस पर बेटा सिसकने लगा और कहा कि यो के करया आपने? उन्हें अस्पताल में ले जाया गया लेकिन तब तक गोलियां अपना असर दिखा चुकी थीं। सेना पर मोर्चे पर दुश्मन की गोलियों का सामना करने से न डरने वाला रामकिशन वन रेंक, वन पेंशन के अन्याय से आत्महत्या करने के लिए विवश क्यों हुआ? पर इसे राजनीतिक मुद्दा बनते देर नहीं लगी। कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी, आप के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, कांग्रेस के रणदीप सिंह सुरजेवाला, किरण चौधरी सहित जितने भी नेता रामकिशन के परिवार से मिलने, सांत्वना देने पहुंचे, सभी को रोका गया दिल्ली पुलिस की ओर से। अस्पताल में धरना-प्रदर्शन करने से दूसरे रोगियों को परेशानी का हवाला देकर इन नेताओं को तो हिरासत में लिया ही गया, रामकिशन के बेटों व परिवारजनों को भी हिरासत में रखा गया। राहुल गांधी को दो-दो बार हिरासत में लेकर छोड़ा। मुख्यमंत्री केजरीवाल कहते रह गए कि दिल्ली का मुख्यमंत्री हूं, भई, मुझे हक नहीं है रामकिशन के परिवार से संवेदना व्यक्त करने का? पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में ले लिया। सवाल यह भी उठता है कि जो सीमा पर शहीद हो रहे हैं, उनकी अंतिम यात्रा में क्यों नहीं गए? सिर्फ राजनीति का रथ हांकने के लिए एक मुद्दा मिल जाने पर कांग्रेस और ‘आप’ एक-दूसरे से होड़ क्यों लगाने लगी? वन रेंक-वन पेंशन को मुद्दा बना कर सैनिकों को धोखे में रखने का आरोप लगाया। राहुल गांधी ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को शर्मनाक बताया तो केजरीवाल ने कहा कि भई, मैं बहुत छोटा आदमी हूं। मुझे कैसे मिलने देते? बीके सिंह कह रहे हैं मुद्दा बनाएं तो बनाएं, सरकार विसंगतियां दूर रह रही है। 

 

खैर, कुरुक्षेत्र, पिहोवा में शहीद जवानों के अंतिम संस्कार में न पहुंचने वाले आत्महत्या करने वाले रामकिशन की विदाई बेला में पहुंचे। शहीद सबके सांझे होते हैं, किसी विशेष दल के नहीं होते। मुख्यमंत्री खट्टर भी पहुंचे, राहुल गांधी, कमलनाथ, पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा, सैलजा, अशोक तंवर, रणदीप सुरजेवाला, कुलदीप बिश्नोई, किरण चौधरी, श्रुति चौधरी, केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह, राव इंद्रजीत सिंह, अरविंद केजरीवाल सब पहुंचे। मुख्यमंत्री खट्टर ने 10 लाख रुपए व सरकारी नौकरी देने का विश्वास दिलाया है। क्रिकेट और राजनीति जैसे अवसर की तलाश में रहते हैं। मुद्दा और सट्टा, भिवानी से यही नतीजा निकला। किसको इस मुद्दे से कितना ग्राफ मिला? चलो, किसी बहाने सब एक जगह, एक साथ श्रद्धांजलि देने पहुंचे। 

 

राजनेताओं से इतना ही कह सकता हूं:-

आपस में चाहे न करो दुआ-सलाम

शहादत को तो न करो राजनीति के नाम

लेखक परिचय

kamlesh-bhartiya

लेखक कमलेश भारतीय हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं। इससे पहले खटकड़ कलां में शहीद भगतसिंह की स्मृति में खोले सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ग्यारह साल तक हिंदी अध्यापन एवं कार्यकारी प्राचार्य।  फिर चंडीगढ से प्रकाशित दैनिक ट्रिब्यून समाचारपत्र में उपसंपादक,  इसके बाद हिसार में प्रिंसिपल रिपोर्टर ।

उसके बाद नवगठित हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष बने। कथा समय मासिक पत्रिका का संपादन। मूल रूप से पंजाब के नवांशहर दोआबा से, लेकिन फिलहाल रिहायस हिसार में। हिंदी में स्वतंत्र लेखन । दस संकलन प्रकाशित एवं एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री पुरस्कार।

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