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रामलीला मंचन और भाजपा का मंथन

October 8, 2016 12:23 pm by: Category: खबर खास 4 Comments A+ / A-

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पहले तो म्हारे शहर हिसार का परम सौभाग्य! किसलिए? भाजपा ने हरियाणा स्वर्ण जयंती समारोह मनाने के लिए सरकार का जो रिपोर्ट कार्ड तैयार करना था, उस पर मंथन करने के लिए म्हारे हिसार को चुना। यानी सरकार आई चल के, म्हारे दुआर। क्या बात है, क्या कहने। धन्न भाग जी, धन्न भाग। कुछ सडक़ों के भी खुल गए भाग। अब मजेदार बात यह रही कि नवरात्रों के दिन थे और नगर में अनेक जगह रामलीलाओं का मंचन, इसी के बीच भाजपा कर रही थी मंथन पर मंथन पूरे दो दिन। इसके बावजूद मुख्यमंत्री खट्टर काका ने दो जगह रामलीला भी देखी। एक सुबह गोल्फ मैदान में बिना गोल्फ खेले अधिकारियों से गप्प-शप्प लगाई और तरोताजा होने के लिए सैर की। पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा आते थे तो सुबह-सुबह बैडमिंडन या लॉन टेनिस खेलने की चर्चाएं रहती थीं। खट्टर काका ने ताजी हवा में चक्कर लगाकर ही काम चलाया।

खैर! अब सवाल यह उठता है कि रामलीला मंचन और भाजपा कार्यसमिति की बैठक के मंथन में कोई तालमेल, रिश्ता या संबंध है? जी हां, यदि कुरुक्षेत्र के भाजपा सांसद राजकुमार सैनी व भाजपा अनुशासन समिति के अध्यक्ष प्रो. गणेशी लाल की बातों पर जाएं तो ऐसा लगता है कि कोई न कोई संबंध तो जरूर है। फरवरी में हरियाणा में हुए जाट आरक्षण आंदोलन से पहले और बाद में भी सांसद राजकुमार सैनी द्वारा दिए जा रहे बयानों से उन पर अनुशासन समिति के अध्यक्ष क्या राय रखते हैं। यह बात सामने आई। प्रो. गणेशी लाल ने कहा कि अभी सांसद सैनी को कोई नोटिस नहीं दिया गया है, बस जुबानी जमा खर्च ही हुआ है। सैनी ने प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की। वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु व कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ उनके बयानों से आहत हुए तो सांसद सैनी से बात करके कहा कि वे ‘लक्ष्मण रेखा’ न लांघें। प्रो. गणेशीलाल ने यह भी माना कि जब सांसद महोदय की जुबान फिसल जाती है तो वे स्पष्टीकरण भी दे देते हैं। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला मुझे कुछ लिखेंगे तो मैं कुछ करूंगा। वैसे बराला कह रहे हैं कि उन्होंने पार्टी हाईकमान को सांसद सैनी की बयानबाजी के बारे में बता दिया है।

अब देखिए, लक्ष्मण रेखा की बात आए तो रामलीला से ही प्रसंग ले आए जवाब में सांसद सैनी। उन्होंने ‘सोने का हिरण’ सामने आएगा तो उसका पीछा तो करना पड़ जाता है। सैनी ने कहा कि अनुशासन समिति ने कोई नोटिस या अल्टीमेटम नहीं दिया क्योंकि मैंने कोई गलत बात नहीं कही। एक भी शब्द किसी जाति, विचारधारा के खिलाफ नहीं कहा। सांसद सैनी ने यह बात भी कही कि फ्रंट सीट नहीं मिली तो दूसरी गाड़ी बदल लूंगा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को वाहन की पिछली सीट पर बिठा दिया जाता है, वे भी ड्राइविंग सीट पर बैठने का सपना देख सकते हैं। फिर यह सपना तो वर्ष 2019 को लेकर है। सीधी बात यह है कि सोने का हिरण व ड्राइविंग सीट मुख्यमंत्री बनने की ओर संकेत है।

भाजपा बैठक में मुख्यमंत्री खट्टर काका ने भी अपने दिल का दर्द बयां किया। कुछ इस तरह कि उन्हें अनुभवहीन मुख्यमंत्री कहा जाता है। एक वर्ष तो सरकार, अधिकार व अधिकारियों को समझने में लग गया। दूसरे वर्ष में योजनाओं की रूपरेखा और अब शुरू होंगी योजनाएं। यानी तीन वर्ष हैं हमारे पास। एक दर्द यह भी कि सबको मंत्री नहीं बना सकते, तेरह बना दिए। सबको सीपीएस नहीं बना सकते, चार बना दिए। चेयरमैनों के पद भी सीमित हैं। क्या करें? केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह अपने अंदाज में व्यंग्य कर गए कि मैरिट और परफॉर्मेंस उनके गले नहीं उतरती। ब्रांड एंबेसेडरों को बनाने पर भी उंगली उठाई। फिर चले गए, बिना उत्तर सुने। खट्टर काका को सहारा लेना पड़ा। कवियों के चुटकुले का  कि अपनी सुना कर चले गए, मेरी सुनी नहीं। यह दर्द भी छलका कि कार्यकर्ताओं के काम नहीं तो विपक्ष के बहकावे में हां में हां मिलाने लगते हैं। बहुत से दर्द दिल में ही रह गए। मंथन हुआ, कार्ड बाकी।

-कमलेश  भारतीय (लेखक हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं।)

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