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ब से बलात्कार, ब से बीफ

September 10, 2016 4:13 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

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कहते हैं जब किसी लकीर को बिना हस्तक्षेप किए छोटी करना होता है, तो उसके पास एक बड़ी लकीर और खींच दी जाती है। राजनीति में भी ठीक ऐसा ही होता है, जब किसी मुद्दे पर सरकार बैकफुट पर चली जाए और दूसरा कोई चारा न बचे, तो खुद को बचाने के लिए नए मुद्दे की एक बड़ी लकीर अक्सर खींच दी जाती रही है। मीडिया को भी इधर नित नया मुद्दा बटोरना होता है जिससे वो ज्यादा से ज्यादा अपने दर्शक या पाठक बटौर सके। उस टाइम मीडिया के लिए ये विवेक शायद चला जाता है कि जनता के लिए जरूरी क्या है? बल्कि उसका स्थान ये ले लेता है कि तुम्हारे पास ज्यादा लोग कैसे आएं? क्योंकि अधिकतर समाचार चैनल सरकार के ही होते हैं तो कई बड़े उद्योगपतियों, चैनल मालिकों की अच्छी सांठ-गांठ राजनैतिक घरानों से अक्सर बन जाती है। गरीब चैनलों को विज्ञापन चाहिए होता है; जनता कैसे समझे आखिर किस टीवी में क्या चल रहा है। खैर, टीवी अपनी जगह है घटनाएं अपनी जगह है। इन दिनों हरियाणा में बीफ का मुद्दा जोरों पर है, जो कि पीछे की सरकारों में नहीं होता था।

आपको बता दें कि केंद्र और हरियाणा दोनों जगह बीजेपी की सरकार है, और राज्य सरकारें अक्सर केंद्र से संचालित होती ही है। यूं तो सरकार किसी धर्म विशेष की बपौती नहीं होती मगर कभी-कभी साख का खतरा जब मंडराने लगे तो कोई भी सरकार अक्सर धर्म का चोगा पहन लेती है। सरकारें यूं तो राज्य में घटने वाली हर हिंसाओं, अव्यवस्थाओं की जिम्मेवार होती है। मगर कई दफा राजनीति की नाक के नीचे भी बेहद घिनौने कांड हो जाते हैं और सरकारे अपनी प्रतिबद्धता के दावे करती रह जाती है। हाल ही की घटना हरियाणा के मेवात जिले की है। बता दें कि मेवात एक मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र है, और सरकारों के लिए हिंदू मुस्लिम राजनीति का एक बड़ा केंद्र भी। ताजा मामले के अनुसार बीती 24 अगस्त को मेवात के डिंगरहेड़ी गांव में एक दर्दनाक वाकया घटता है। बात उस समय की है जब रात के समय आम लोग दिनभर की मेहनत के बाद सो रहे होते हैं। उस वक्त यहां के एक किसान जूरूदीन की ढाणी पर हत्या व बलात्कार की जघन्य दरिंदगी का कहर टूटता है। 8 लोग घर में घूसते हैं एक औरत की हत्या करते हैं, उसके पति की हत्या करते हैं। दरिंदगी यहीं खत्म नहीं हो जाती। घर में सो रही दो युवतियों को अपनी हवश का शिकार बनाते हैं और चले जाते हैं।

घटना गंभीर तो है ही, चिंताजनक भी है। मगर विडंबना ये कि घटना को कई दिन बीत जाने के बाद भी एक ओर जहां सरकार की ओर से कोई ठोस बयान नहीं आते तो वहीं प्रशासन द्वारा भी ढीलामस्ती देखी जाती है। कई संगठन पीड़ित परिवार के साथ सहानुभूति जताते हैं, उन्हें दिलासा देते हैं, ढांढस बंधवाते हैं। लेकिन अहम बात ये कि जो सगंठन देशभक्ति की बड़ी-बड़ी बातें कहता है, वो आगे नहीं आता। जी हां, हम उसी आरएसएस की बात कर रहें हैं जो बीजेपी का अहम संघ है, बीजेपी के तमाम लोग इससे जुड़ते हैं, इसके नियम-विधान मानते हैं और पार्टी की सदस्यता अपनाते हैं। ज्ञात रहे कि ये वही संघ और उससे जुड़ी पार्टी है जो नारी सशक्तिकरण के दावे करती है, बेटी बचाने की, बेटी पढाने की बात करती है। लेकिन लेकिन इस घटना के पीड़ित पक्ष ने दिल्ली में जाकर ये आरोप लगाया है कि हरियाणा पुलिस और राज्य सरकार पर उन्हें कोई विश्वास नहीं है और दोनो ही शासन-प्रशासन आरोपियों को बचा रहे हैं। उन्होनें इस घटना को लेकर सरकार से सीबीआई जांच की भी मांग की है। पीड़िता का आरोप है कि इस घटना को अंजाम देने वालों में से दो जने आरएसएस और गौ रक्षा दल से संबंध रखते हैं और उन्होनें वहां पर ट्रेनिंग भी ली है।

वहीं पीड़ितों के वकील महमूदुल हसन के मुताबिक हरियाणा पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ जो धाराएं लगाई हैं वो ही सारी कहानी अपने आप में बयां कर रही है। उन्होनें दिल्ली में पत्रकारों को बताया कि पुलिस ने आरोपियों पर जो 459 और 460 धारा लगाई थी वो सिर्फ घर में घुस कर मारपीट करने के बाद ही लगाई जाती है। उन्होनें कहा कि गांव के लोगों के दवाब की वजह से पुलिस ने बाद में हत्या और बलात्कार की धारा लगाई। खैर, इन सबके बाद जब भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह से बैकफुट पर आ जाती है तो और कोई चारा उसके पास नहीं बचता और पूरा मीडिया जब उससे जवाब मांग रहा होता है तो एक नई घटना सामने आती है। होता यूं है कि हरियाणा में मेवात के ही मुंडका गांव में फिरोजपुर झिरका क्षेत्र है। जहां से शिकायत मिलती है कि यहां बिरयानी में बीफ यानि गाय का मांस मिलाया जा रहा है। मेवात में गौ रक्षा आयोग इस बात की शिकायत करता है, करीब सात बिरयानी की दुकानों से नमूने लिए जाते हैं और जांच के लिए हिसार की लाला लाजपत राय यूनिवर्सिटी ऑफ वेटरनरी एंड एनिमल साइंस में भेजा जाता है, नमूनों के रिजल्ट पॉजिटिव भी आते हैं और एक नई बहस यहां के मीडिया में छिड़ जाती है, डिंगरहेड़ी को लोग भूल जाते हैं और नया विषय होता है बीफ का।

जानकारों और मेवात के स्थानीय लोगों की मानें तो ये बीजेपी द्वारा सोची समझी रणनीति के कारण हुआ है। आपको बता दें कि मेवात एक मुस्लिम बाहुल्य इलाका है और इसी में डिंगरहेड़ी कांड हुआ था, यहीं से बिरयानी के नमूने उठाना क्या सच में मुद्दे को रूपांतरित करना नहीं मालूम पड़ता? क्या बिरयानी के सैंपल हरियाणा के रोहतक, हिसार या सिरसा से नहीं लिए जा सकते थे? सवाल ये भी उठता है कि क्या इसी वक्त नमूने ले लेना ही जरूरी था ? क्या हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर के मुख्यमत्री बनने के बाद पहले भी इस तरह नमूने लिए गए हैं? क्या इतने कम समय में किसी नमूनों के पॉजिटिव रिजल्ट देकर पहले भी सरकार के नुमाईंदो ने आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की बात कही? ऐसे कई सवाल हमारे जेहन में पैदा होते हैं जो कि अहम है। भले ही आरोप लगाने वालों को सरकार विरोधी मान लिया जाता हो और विपक्ष लबादा उन्हें ओढ़ा दिया जाता हो, लेकिन क्या सच में सरकार बीफ को लेकर गंभीर है? और गंभीर है भी तो गंभीरता इतनी देरी क्यों सामने आई? बहरहाल मुद्दा चाहे किसी भी तरह का मीडिया मे फैला दिया जाए मगर असली इंतजार डिंगरहेड़ी मामले के आरोपियों का गिरफ्तार होना और उन पर कार्रवाई होना है ताकि ताकि सरकार की पारदर्शिता सही रूप से सामने आ सके।

-एस.एस.पंवार, कंटेंट एडिटर, हरियाणा खास

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