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बेटी बचाओ बेटी पढाओ लेकिन क्यों और कैसे?

हर रोज होते दुष्कर्मों से कैसे हों बेटी महफूज़

July 20, 2016 12:32 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

-जगदीप सिंह

हरियाणा में वैसे तो बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की मुहिम रंग ला रही है और सरकार ने दावा किया है कि पिछले दस सालों में पहली बार लिंगानुपात कम होने के सकारात्मक परिणाम सामने आये हैं लेकिन वहीं दूसरी और एक कड़वा सच यह भी है कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध के ग्राफ में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। दुष्कर्म के मामले तो लगभग हर रोज समाचारों के जरिये सामने आते ही रहते हैं। दुष्कर्मियों के हौसलें इतने बुलंद हो रहे हैं कि वे जमानत पर रिहा होकर पीड़िता के साथ एक बार फिर से सामुहिक दुष्कर्म कर फरार हो जाते हैं।

rape case haryana

अक्तूबर 2013 में भिवानी में युवती के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज करवाया था। युवती किसी तरह सदमे से उभरती है और न्याय के लिये संघर्षरत रहते हुए नए सिरे से अपनी जिंदगी को जीने की कोशिश करती है लेकिन आरोप है कि आरोपी फिर लड़की पर लगातार मामला वापस लेने के दबाव डालते हैं यहां तक कि एक न्यूजवेबसाइट के अनुसार युवती को 50 लाख तक ऑफर किये जाते हैं। परिजनों को मारने की धमकियां तक देते हैं लेकिन बावजूद इस सबके लड़की टस से मस नहीं होती तो झल्लाये हुए यह पांचों आरोपी लड़की को जमानत से रिहा होकर फिर से उठाते हैं और सामूहिक दुष्कर्म के बाद लड़की को रोहतक के सुखपुरा चौंक पर फेंक जाते हैं। ताजा जानकारी तक पुलिस ने तीन को गिरफ्तार भी किया है लेकिन दो अभी भी फरार हैं।

 

चौंकाने वाले हैं दुष्कर्म के आंकड़ें

2004 से लेकर यदि 2014 तक के आंकड़ो पर नजर डालें तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आते हैं 2004 में हरियाणा में महिलाओं के खिलाफ होने वाले कुल 4276 मामलों में जहां दुष्कर्म के 386 थे वहीं 2014 में यह आंकड़ा 8974 मामलों में 1174 पर पंहुच गया है। इतना ही नहीं यदि 2001 से लेकर 2014 तक के आंकड़ो का ही हिसाब लगाया जाये तो साल दर साल दुष्कर्म के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है और पिछले कुछ सालों में तो यह प्रवृति भयंकर रूप लेती जा रही है। 2014 में तो सामूहिक दुष्कर्म के मामले भी बढ़े हैं 1174 में से 230 मामले सामूहिक दुष्कर्म के हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो पर अभी साल 2015 व 16 के आंकड़े अभी मौजूद नहीं है लेकिन समाचार पत्रों में आये दिन सामने आ रही दुष्कर्म की खबरों से लगता है आने वाले आंकड़ों की तस्वीर और भी भयानक होगी।

क्यों बलात्कारी होता जा रहा है समाज

जो युवा दुष्कर्म या सामूहिक दुष्कर्म के मामलों में संलिप्त होते हैं जाहिर है वे कहीं बाहर से नहीं आये बल्कि हमारे समाज का ही हिस्सा हैं। लोगों में इस बलात्कारी प्रवृति के पनपने की वजह कुत्सित मानसिकता, दमित इच्छाएं, कुंठाओं और प्रतिशोध के अलावा क्या हो सकती है। यदि दुष्कर्म के मामलों का अध्ययन करें तो पता चलता है अधिकतर दुष्कर्म करीबियों द्वारा, जानकारों द्वारा अंजाम दिया जाता है। ऐसा समाज क्या वाकई बेटी बचाने और बेटी पढ़ाने के लायक है।

कैसे बचेंगी बेटियां जब………

ऐसी घटनाओं पर विपक्ष से लेकर समाज सेवी संस्थाओं और बुद्धिजीवियों तक तरह तरह की बातें करते हैं राजनीतिक अपने दौर को भूलकर जंगलराज बताते हैं तो महिला उत्पीड़न के नाम पर काम करने वाली संस्थाएं चिंता जाहिर करने के लिये प्रैस विज्ञप्तियां जारी करती हैं कुछ संवेदनशील लोग सांकेतिक धरने-प्रदर्शन भी आयोजित करने लगते हैं और फिर एक दो चार दिन बाद अगले किसी मामले तक के लिये सब शांत हो जाते हैं। ऐसे में हरियाणा के कवि मंगतराम शास्त्री जी के गीत की ये पंक्तियां अक्सर याद आ जाती हैं

 

ना महफूज़ आबरू रह री बच्या नहीं विश्वास सखी

किस पै करां भरोसा ए बेबे नहीं बची कोये आस सखी

बेटी बचाओ बेटी पढाओ लेकिन क्यों और कैसे? Reviewed by on . -जगदीप सिंह हरियाणा में वैसे तो बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की मुहिम रंग ला रही है और सरकार ने दावा किया है कि पिछले दस सालों में पहली बार लिंगानुपात कम होने के सकारात -जगदीप सिंह हरियाणा में वैसे तो बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की मुहिम रंग ला रही है और सरकार ने दावा किया है कि पिछले दस सालों में पहली बार लिंगानुपात कम होने के सकारात Rating: 0

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