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रावण दहन – आतंक का या यूपी चुनाव का

October 11, 2016 7:38 pm by: Category: खबर खास 2 Comments A+ / A-

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उरी आर्मी कैंप ऑफिस पर हुए घिनौने आतंकवादी हमले के बाद जवाब में किए सर्जिकल स्ट्राइक को कितने दिन बीते, दशानन यानी रावण दहन का दिन भी आ गया पर अभी तक राजनीतिक दलों के बीच इसे लेकर दे दनादन जारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजधानी दिल्ली की बजाय लखनऊ में जाकर दशहरा मनाना चुना। यह उनका अधिकार है, मन की उड़ान है, वे जहां चाहे, वहां जाकर दशहरा मनाएं, आखिर प्रधानमंत्री जो ठहरे। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चुटकी लेते हुए कह दिया कि उत्तर प्रदेश में चुनावों को देखते हुए ही प्रधानमंत्री ने दशहरा मनाने के लिए लखनऊ को चुना, यदि बिहार में चुनाव होता तो मोदी जी बिहार में दशहरा मनाते।

बेशक नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के भाजपा नेताओं को निर्देश दिए हैं कि इस पवित्र पावन त्योहार को किसी प्रकार का राजनीति का रंग न दें। यह भी बताना जरूरी है कि इस अवसर पर न तो नरेंद्र मोदी के हाथों रावण दहन करवाया जाएगा और न ही उनकी मौजूदगी में या बाद में सर्जिकल स्ट्राइक से जोड़ा जाएगा। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से सख्त निर्देश दिए गए हैं कि कार्यक्रम के दौरान कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी केवल राम की आरती उतारेंगे। हां, रावण के पुतले पर यह जरूर लिखा जा रहा है कि ‘आतंकवाद का समूल नाश हो।’

खबरिया चैनलों ने अरविंद केजरीवाल, संजय निरूपम, पी. चिदंबरम व बाद में राहुल गांधी के सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर दिए गए  ‘खून की दलाली’ वाले बयान को लेकर दे दनादन, लंबी-लंबी बहसें चलाई और फौजी जवानों की शौर्य गाथाएं इन बहसों के बोझ तले दब गयीं। ऐसे में कांग्रेस ने भी यह रहस्योद्घाटन किया कि सर्जिकल स्ट्राइक वर्ष 2011 में हमने भी किया था, जिसका नाम था ऑपरेशन जिंजर। इसके बावजूद इसका कोई राजनीतिक लाभ नहीं लिया जबकि भाजपा सर्जिकल स्ट्राइक का लाभ उत्तर प्रदेश व पंजाब के आने वाले विधानसभा चुनाव में उठाने की फिराक में है। इसी तरह एनसीपी के अध्यक्ष व पूर्व रक्षा मंत्री शरद पवार ने भी रहस्योद्घाटन किया कि उनके रक्षामंत्री रहते तीन बार सर्जिकल स्ट्राइक की गई थी लेकिन इसका राजनीतिक लाभ नहीं लिया, न लिया जाना चाहिए। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री व बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी अपनी रैली में कहा कि पठानकोट में एयरबेस के हमले के बाद ही सर्जिकल स्ट्राइक होनी चाहिए थी। अब चुनाव को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। भाजपा-कांग्रेस एक-दूसरे से माफी मांगने की बात भी उठा रही हैं।

दशहरा तो आज है लेकिन सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर शंका जताने या सबूत मांगने वालों  के पुतले जगह-जगह भाजपा कार्यकताओं द्वारा फूंके गए। इस तरह दशहरे का माहौल कई दिन पहले से भी बना हुआ है। सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाने वालों पर शहीदों का अपमान करने का आरोप लगाकर देशद्रोह का केस चलाने की मांग की जा रही है। चंदौली में कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ खून की दलाली के बयान को लेकर याचिका दायर कर दी गई है। भाजपा ऑपरेशन जिंजर पर सवाल उठा रही है कि जब यह ऑपरेशन किया गया, तब देश को जानकारी क्यों नहीं दी गई? ल्यो, हो गई न वही बात कि कोई यह एतराज उठा रहा है कि सर्जिकल स्ट्राइक की जानकारी क्यों दी गई और दी गई तो राजनीतिक लाभ क्यों उठाया जा रहा है? जगह-जगह पोस्टर क्यों लगाए जा रहे हैं? और भाजपा यह बात उठा रही है कि ऑपरेशन जिंजर की  जानकारी पहले क्यों छिपाई और अब क्यों बता रहे हो? शहीदों के परिवारजनों के न अभी तक आंसू रुके हैं, न ही शहीदों की चिताएं अभी ठंडी हुई हैं। फिर राजनेता किस बात पर, किसके बल पर, दे दनादन बहस चलाए हुए हैं।

अंत में इतना ही:-

देखो वीर जवानों अपने

खून पे ये इल्जाम न आए

मां न कहे कि मेरे बेटे,

वक्त पड़े पर काम न आए।।

हरियाणा खास की और से आप सभी को विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं….

-कमलेश  भारतीय (लेखक हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं।)

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Comments (2)

  • kamlesh bhartiya

    mere lekh prakashit karne v bare pathak varg tak pahunchane ke liye aabhar. par nam ke sath photo bhi laga sako to aur behtar hoga. yeh sujhav hai koyi sharat nahin.

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