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दशहरा – रामायण का असली हीरो है रावण

September 29, 2017 6:04 pm by: Category: खबर खास, तीज तयोहार Leave a comment A+ / A-

ramleela

दशहरा आते ही पूरे उत्तर भारत में राम से ज्यादा रावण का जिक्र होने लगता है। राम का नाम औपचारिकता के लिये भले ले लिया जाता हो लेकिन असल में गुणगान तो रावण का ही किया जाता है। बड़ी सिद्दत से लोग रावण को विजयदशमी के लिये तैयार करते हैं। कहीं कहीं तो इसके आकार को लेकर भी प्रतियोगिता होने लगती है। जिसका रावण जितना बड़ा और आक्रामक दिखता है उनका दशहरा भी भव्य माना जाता है। दस सिर वाले रावण के बारे में कहा जाता है कि दसों सिर किसी न किसी बुराई का प्रतिनिधित्व करते हैं। आइये एक नजर डालते हैं इन्हीं रावण के चरित्र पर…..

क्या रावण वाकई बहुत बुरा था

वैसे तो रामायण के ही सैंकड़ो संस्करण अकेले भारत में मौजूद हैं जिनमें हर रामायण में कुछ समानताएं हैं तो कुछ भिन्नताएं भी हैं। मुख्य रुप से वाल्मिकी रामायण और रामचरित मानस के जरिये ही लोग रामायण की कहानी से परिचित हैं। इस कहानी के आधार पर भी यदि रावण के चरित्र का आकलन किया जाये तो सबसे पहली बात तो यही कही जा सकती है रावण का किरदार स्थापित करने के लिये लेखक ने रामायण के नायक श्री राम से भी ज्यादा मेहनत की है। कुछ बातें जो रावण के बारे में हमें जाननी चाहिये –

दशानन रावण

रावण के दस सिर माने जाते हैं जिन्हें दस अवगुणों या कहें बुराईयों का प्रतीक माना जाता है लेकिन इसके उलट कुछ मान्यताओं के अनुसार रावण के पास एक ऐसी माला थी जिसके रिफ्लेक्शन से यह आभास होता था कि रावण के दस सिर हैं। दूसरा यह भी रावण के पास मायावी शक्तियां थी जिनसे वह यह भ्रम पैदा कर सकता था कि उसके दस सिर हैं जबकि असल में एक ही सिर था। वहीं एक और तर्क दिया जाता है जो कि सत्य के नजदीक भी माना जा सकता है वह यह कि रावण 6 शास्त्र और 4 वेदों का ज्ञाता था जिसके कारण उन्हें दसकंठी कहा जाता था संभव है उनकी इसी योग्यता के कारण रावण का नाम दशानन भी पड़ा हो।

संगीतज्ञ रावण

रावण एक संगीतज्ञ भी था रावण के बहुत से चित्रों में वह वीणा वादन करते हुए भी नजर आते हैं। भगवान शिव की स्तुति के लिये रावण ने शिव तांडव स्त्रोत की भी रचना की इसका संगीत रावण ने खुद तैयार किया था। इसके अलावा रावण ने एक तंत्री वाद्य भी तैयार किया था जिसे रावण वीणा भी कहा जाता है। रावणहत्था नाम का एक लोकवाद्य आज भी मौजूद है जिसे राजस्थान के लोक कलाकार अक्सर बजाते हुए मिल जाते हैं यह भी वीणा और सारंगी के मेल से बना एक तंत्री वाद्य होता है। यह भी रावण का संगीत से संबंध स्थापित करता है।

 चिकित्सक रावण

रावण को चिकित्सक भी माना जाता है। नाड़ी का उन्हें अच्छे से ज्ञान था इसी को लेकर नाड़ी परीक्षा नामक ग्रंथ की रचना भी उनके द्वारा मानी जाती है। आर्युवेद में उनके इस ग्रंथ का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।

ज्योतिषी रावण

रावण को ज्योतिष विद्या की भी गहरी समझ थी, माना जाता है कि रावण समय को नियंत्रित कर सकते थे, समस्त ग्रहों को अपने अनुसार चला सकते थे। मान्यता है कि जब मेघनाथ का जन्म हुआ तो उन्होंने सभी ग्रहों को ग्याहरवें स्थान में रहने का आदेश दिया शनि ग्रह ने इसका विरोध किया और वह 12वें स्थान पर खिसक गया जिसके परिणाम स्वरुप रावण ने शनि को प्रताड़ित भी किया। अरुण संहिता व रावण संहिता ज्योतिष को लेकर लिखे गये उनके महत्वपूर्ण ग्रंथ माने जाते हैं।

रावण के जीवन से और भी बहुत कुछ सीखा जा सकता है। राम के साथ युद्ध में पराजय के बाद जब रावण मरणासन्न थे तो राम ने लक्ष्मण को रावण के पास कुछ सीख लेने के लिये भेजा। अपने अनुभव से जो बात उस समय रावण ने लक्ष्मण को बताई वे सभी के लिये अनुकरणीय हो सकती हैं। अंतिम क्षणों में रावण का कहना था कि आदमी को कभी भी ज्ञान व शक्ति का अभिमान नहीं करना चाहिये, अपने परिजनों, से लेकर नौकरों तक को विश्वास में लेकर चलना चाहिये, अपने समझदार मंत्री की बात कभी भी हल्के में नहीं लेनी चाहिये। असल में रावण की पराजय इन्हीं सब कारणों से हुई थी। उसके अपने भाई विभीषण ने एक के बाद एक सारे राज खोल दिये जिस कारण रावण की पराजय संभव हुई।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि रावण को जलाने की बजाय रामायण के अध्ययन से हमें रावण सहित रामायण के प्रत्येक पात्र से कुछ सबक लेने की जरुरत हैं। अन्यथा रावण के पुतले चाहे कितने बड़े आकार के फूंके जायें उससे कुछ हासिल होने वाला नहीं है।

दशहरा – रामायण का असली हीरो है रावण Reviewed by on . दशहरा आते ही पूरे उत्तर भारत में राम से ज्यादा रावण का जिक्र होने लगता है। राम का नाम औपचारिकता के लिये भले ले लिया जाता हो लेकिन असल में गुणगान तो रावण का ही क दशहरा आते ही पूरे उत्तर भारत में राम से ज्यादा रावण का जिक्र होने लगता है। राम का नाम औपचारिकता के लिये भले ले लिया जाता हो लेकिन असल में गुणगान तो रावण का ही क Rating: 0

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