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TRL 2016 – स्टेमिना पॉवर फुर्ती और दिमाग की चुस्ती का मिश्रण है रूमाल छूं

August 28, 2016 5:41 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

TRL 2016

इन दिनों डेरा सच्चा सौदा के प्रयासों से एक खेल काफी सुर्खियों में है। नाम है रूमाल छू……..  क्या हैं इस खेल के नियम…. और कैसे शुरु हुई तिरंगा रुमाल छू लीग बता रहे हैं…. हरियाणा की माटी से जुड़े कवि और वरिष्ठ पत्रकार रमेश चहल

पश्चिम देशों की नकल में दादा-परदादा के बनाए खेलों के रोमांच को भूल चुका युवा वर्ग स्कूल के दिनों में खेले जाने वाले खेलों से दूर होता जाता है। गुल्ली डंडा, कबड्डी, डिटे उठाना, रूमाल उठाना, खो-खो, लंगड़ी-दौड़, एक दूसरे को पकड़ना सहित अनेक खेल आज कहानियों की कहानी बन चुके हैं। बचपन में हम सभी ने बहुत से बहुत से देसी खेल खेले होंगे। पर क्या कभी आपने ऐसा सोचा है कि कहाँ गए वो खेल जो हमारी संस्कृति से जुड़े हुए थे? पूरे विश्व को खेल आर्ट सिखाने वाला भारत आखिर क्यूँ अपनी सांस्कृतिक विरासत सहेजने में चूक गया? फुटबाल, गोल्फ, टेनिस और क्रिकेट जैसे खेलों की चकाचौंध में खो-खो, गिल्ली-डंडा, रुमाल-छू, लंगड़ी-दौड़ जैसे पारम्परिक खेल जाने कब खो गए हमें पता भी नहीं चला। इतना ही नहींआधुनिक खेलों में सफलता पाने को आतुर खिलाड़ी नशों की गर्त में बुरी तरह से उलझ चुके हैं। नशे की दलदल में बुरी तरह धंसे ये युवा आज विदेशी खेलों को अपना खेल मानने में लगे हैं पर वे अपने ही परंपरागत खेलों को पूर्णतया भूला चुके हैं।

युवाओं को नई दिशा दिखाने के साथ-साथ अपने पुरातन से जोड़ने को प्रयासरत डेरा सच्चा सौदा के संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने क्रिकेट का 20-20 खेल, गुल्ली डंडा व बेसवाल का मिश्रण की गुलस्टिक खेल इजाद करने के बाद एक और परंपरागत खेल को इजाद किया है। इस खेल का नाम है रूमाल छूं। डेरा संत ने सर्कल कबड्डी, नेशनल कबड्डी,कुश्ती, खो-खो और एक दो और खेलों को मिलाकर नियमों के बंधन में बांधकर रूमाल उठाना को ऐसा बनाया कि बड़े-बड़े हाईटेक गेम भी इसके रोमांच के आगे पानी मांगते नजर आए। इस खेल में स्टेमिना, पॉवर, फुर्ती और दिमाग की चुस्ती के मिश्रण के साथ-साथ कबड्डी से ज्यादा दमखम एवं अन्य खेलों से ज्यादा स्टेमिना एवं दिमाग की आवश्यकता है।

डेरा संत का कहना कि हमारी दिली इच्छा है कि उन्हीं खिलाड़ियों में से कुछ और गेमों में लगाएं , ताकि वो ओलंपिक या एशियाड में देश के लिए मैडल जीतकर लाएं ताकि वो अपने मां बाप का ही नहीं देश का नाम रोशन करें।

यह है रुमाल छू प्रतियोगिता

रूमाल छू प्रतियोगिता में 32 गुना 12 मीटर का मैदान होता है तथा मैदान के बीच में दो फुट त्रिज्या वाले घेरे में रूमाल रखा होता है। दोनों टीमों के 9-9 खिलाड़ी समान दूरी पर होते हैं। खिलाड़ियों का नंबर बोले जाने पर दोनों टीमों के समान अंक वाले खिलाड़ी दौड़ कर रूमाल को उठाकर अपने पाले में लाने का प्रयास करते हैं तथा एक-दूसरे को रोकने का प्रयास करते हैं, जो खिलाड़ी रूमाल को बिना टच हुए अपने पाले में ले जाता है, उसे तीन अंक और जो खिलाड़ी टच होने के बावजूद रूमाल ले जाता है, उसे एक अंक दिया जाता है।

TRL 2016 2

खेल सरपंच बनाम खेल सरपंच

ग्रामीण आंचल के इस खेल में एमएसजी ने ग्रामीण टच भी रखा है। निर्णायक की भूमिका निभाने वाले रेफरी को ‘खेल पंच की उपाधि दी है। उनकी टी शर्ट के पीछे भी ‘खेल पंच लिखा हुआ है। थर्ड अंपायर के रूप में मैच के रिव्यू देखकर अंतिम निर्णय देने वाले एमएसजी को ‘खेल सरपंच की उपाधि से अलंकृत किया गया है। विवादित निर्णयों में टीम के कप्तान द्वारा रिव्यू मांगे जाने पर संबंधित खिलाड़ी की वीडिय़ो रिकार्डिंग को स्लो मोशन में बड़ी स्क्रीनों पर देखा जाता है और बारीकी से जांच करने के बाद ‘खेल सरपंच यानि एमएसजी अंतिम निर्णय के रूप में ग्रीन लाईट जलाकर अपना निर्णय देते हैं।

यह हैं नियम

इस खेल में रेडर रूमाल छू को उठाता है और भाग जाता है, कैचर उसे छू देता है तो रेडर का एक प्वाइंट होगा। अगर कैचर रेडर को रख लेता है तो कैचर के खाते में 2 अंक जुड जाएंगे। अगर रेडर बिना टच हुए, रूमाल छू ले जाता है तो उसके खाते में 3 अंक होंगे और अगर कैचर रूमाल छू समेत रेडर को उठाकर ले जाता है तो कैचर के खाते में 4 अंक जुड़ जाएंगे। इसके अलावा सर्किल के चारों और नहीं घूमने पर, प्रतिदंद्वी खिलाड़ी के कपड़े पकड़ने पर, एक साथ दो खिलाडियों के बाहर आने व खिलाड़ी को जानलेवा तरीके से पकड़ने को फाउल की श्रेणी में रखा गया है।

इस खेल में भी मिलते हैं ग्रीन रैड व येलो कार्ड

आधुनिक खेलों की तरह इस परंपरागत खेल में भी ग्रीन कार्ड, रैड कार्ड व येलो कार्ड का प्रावधान रखा गया है। खिलाड़ी अगर खेल नियमों को भंग करता है तो उसे ग्रीन कार्ड से शुरू कर नहीं मानने तक येलो कार्ड तक का प्रावधान रखा गया है।

नशेड़ी खिलाड़ियों को डोप टेस्ट का भय

डेरा प्रमुख द्वारा इजाद किए गए इस परंपरागत हाईटेक गेम को नशीले पदार्थों से दूर रखने के लिए डोप टेस्ट का प्रावधान रखा गया है। डोप टेस्ट का ही परिणाम है कि टीम को विजेता बनाने का दम भरने वाले कई खिलाड़ी डोप टेस्ट के दौरान टीम से बाहर किए जा चुके हैं।

इस खेल के जनक डेरा सच्चा सौदा के संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने कहा कि तिरंगा रूमाल छू लीग करवाने का आईडिया एमएसजी ऑनलाईन गुरुकुल फिल्म के दौरान आया। इस फिल्म में उन्होंने भी रूमाल छू खेल खेला है। खिलाडिय़ों को खेल संबंधित टिप्स देते हुए उन्होंने कहा कि खिलाड़ी का लक्ष्य दायरे तक पहुंचाना हो, जिसमें रूमाल रखा होता है। ज्यादा भागते हैं तो पॉवर चली जाती है। स्पीड में आते खिलाड़ी आगे निकल जाते हैं, खिलाडिय़ों को बे्रक पर जोर देना होगा। पूज्य गुरुजी ने कहा कि अभी खेल नया है और खिलाड़ी धीरे धीरे इसके नियमों को समझेंगे। उन्होंने कहा कि रूमाल छू खेल में जीत का दारोमदार पूरी टीम पर होता है ना की एक अकेले खिलाड़ी पर। पॉवर, दिमाग और फुर्ती के इस खेल में जो भी फुर्ती से आता है वो 4 अंक भी हासिल कर सकता है, 3 भी, 2 भी और 1 अंक भी। उन्होंने बताया कि वे स्वयं 32 नेशनल गेम्स खेले हैं और गांवों की बहुत सारी खेल खेली है। उन्होंने कहा कि खेलों के आयोजन का उनका प्रयास सफल हो रहा है और खिलाड़ी नशों से दूर हो रहे हैं। पहले उन्होंने टवेंटी टवेंटी क्रिकेट का फामूर्ला दिया, जिसे आज पूरी दुनियां स्वीकार चुकी है। उसके बाद गिल्ली डंडा खेल को ‘गुलस्टिक खेल के रूप में नया रूप दिया और अब ग्रामीण आंचल की पांच खेलों को मिलाकर बनाए गए रूमाल छू खेल को भी युवा वर्ग बेहद पसंद कर रहा है।

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