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साक्षी मलिक ने दिया भारत को रक्षाबंधन का तोहफा

रियो ओलिंपिक में कांस्य पदक जीत खोला भारत का खाता

August 18, 2016 3:33 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

Saakshi win bronze in rio

 

रियो ओलिंपिक ( #Rio2016 ) 17 अगस्त की ढलती हुई रात जब 18 अगस्त की और बढ़ रही थी तो भारत वासियों के लिये एक बेटी रक्षाबंधन का तोहफा देने के लिये ब्राजील के रियो डे जेनेरियो में अपना पसीना बहा रही थी…. अपने दाव-पेंच लड़ा रही थी। एक समय जब पूरा देश इस बेटी की हार से हतोत्साहित सा हो गया था अचानक उससे जीतने वाली प्रतिद्वंदी के फाइनल में पंहुचने पर फिर से पदक की उम्मीदें जाग उठीं। यह खिलाड़ी हैं साक्षी मलिक जिसने रियो ओलिंपिक में भारत के लिये एक नई उम्मीद जगाई है। जिसने रात को भी भौर की सूर्य की किरणों जैसा उज्जवल कर दिया है। 58 किलोग्राम भार वर्ग में अपने रिफेज राउंड में साक्षी ने लगातार हुए दो मुकाबलों में जर्मनी और मंगोलिया की पहलवानों को पटखनी दी। कांस्य पदक के लिये हुए मुकाबले में किर्गिस्तान की पहलवान को कड़ी टक्कर में 7-5 से पटखनी देकर साक्षी ने देश के लिये रियो ओलिंपिक का पहला पदक हासिल किया।

आपको बतादें की साक्षी मलिक हरियाणा के रोहतक जिले के मोखरा गांव की रहने वाली है, इंस्ताबुल में पूर्व विश्व चैंपियन खिलाड़ी को हराकर साक्षी ने रियो का टिकट कटाया था। अपनी पहलवानी के शुरुआती दिनों में साक्षी सुल्तान फिल्म की आरफा की तरह लड़कों से कुश्ती करती थी जिसे लेकर उसे रूढ़ीवादी लोगों ने हतोत्साहित करने की कोशिश भी लेकिन उसने किसी की परवाह न करते हुए अपना सफर जारी रखा और अपने कोच ईश्वर दहिया के मार्गदर्शन में अनेक राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में जीत हासिल की। 2014 में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में साक्षी ने रजत पदक हासिल किया था। 2015 में दोहा में आयोजित हुई एशियन कुश्ती चैंपियन शिप के 60 किलोग्राम भार वर्ग में साक्षी ने कांस्य पदक हासिल किया था।

अपनी इस जीत के साथ साक्षी ने रियो में इतिहास तो रच ही दिया है। साथ ही मायुस हो रहे भारतीय खेमे में एक नई उम्मीद भी जगा दी है। अब निगाहें बैडमिंटन में पीवी  सिंधु और कुश्ती में अन्य पहलवानों पर टिकी हैं। उम्मीद है कुछ और पदक भारत की झोली में आयेंगें।

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