Sunday , 27 May 2018

Home » साहित्य खास » एक हमारी और एक उनकी

एक हमारी और एक उनकी

January 1, 2018 9:46 am by: Category: साहित्य खास Leave a comment A+ / A-

एक हमारी और एक उनकी

एक हमारी और एक उनकी
मुल्क में हैं आवाजें दो
अब तुम पर है कौन सी तुम
आवाज सुनों तुम क्या मानो

हम कहते हैं जात धर्म से
इन्सा की पहचान गलत
वो कहते है सारे इंसा
एक है यह एलान गलत

हम कहते है नफरत का
जो हुक्म दे वो फरमान गलत
वो कहते है ये मानो तो
सारा हिन्दुस्तान गलत.

हम कहते है भूल के नफरत,
प्यार की कोई बात करो…
वो कहते है खून खराबा
होता है तो होने दो.

एक हमारी और एक उनकी
मुल्क में हैं आवाजें दो.
अब तुम पर है कौन सी तुम
आवाज सुनो तुम क्या मानो.

हम कहते हैं इंसानों में
इंसानों से प्यार रहे
वो कहते है हाथों मे
त्रिशूल रहे तलवार रहे.

हम कहते हैं बेघर बेदर
लोगों को आबाद करो
वो कहते हैं भूले बिसरे
मंदिर मस्जिद याद करो

एक हमारी और एक उनकी
मुल्क में हैं आवाजें दो
अब तुम पर है कौन सी तुम
आवाज सुनो तुम क्या मानो.’

– जावेद अख्तर

 
एक हमारी और एक उनकी Reviewed by on . एक हमारी और एक उनकी एक हमारी और एक उनकी मुल्क में हैं आवाजें दो अब तुम पर है कौन सी तुम आवाज सुनों तुम क्या मानो हम कहते हैं जात धर्म से इन्सा की पहचान गलत वो क एक हमारी और एक उनकी एक हमारी और एक उनकी मुल्क में हैं आवाजें दो अब तुम पर है कौन सी तुम आवाज सुनों तुम क्या मानो हम कहते हैं जात धर्म से इन्सा की पहचान गलत वो क Rating: 0

Leave a Comment

scroll to top