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कैसे हो कवि

मजदुर संघठन समिति - झारखंड पर राज्य सरकार ने जो गैरकानूनी तरीके से बैन किया है। इस बैन के खिलाफ अंजनी कुमार कि कवियों को सम्बोधित करती कविता

December 30, 2017 9:41 am by: Category: साहित्य खास Leave a comment A+ / A-

कैसे हो कवि

तुम प्रतिबंधित नहीं हो 
तुमसे है प्रतिबंध
तुम्हारे शब्दों से डर जाती है सरकार

तुम्हारी उपस्थिति से
कानून के पैर होने लगते हैं कमजोर
पुलिस की सांस अटक जाती है छाती में

सरकार के प्रतिनीधि का कहना हैः
तुमसे उनकी व्यवस्था बिगड़ती है;

अब कौन कहे उनसे
कवि सरकार का प्रतिनीधि नहीं होता
और कविता के संसार में
सरकारी व्यवस्था नहीं होती
कवि प्रतिबंध की सरहदों में नहीं होता

फिलहाल लग चुका है
मजदूर संगठन पर प्रतिबंध
तुमसे कहना था तुम्हारे ही शब्दों मेंः
वे बूटों से रौंद रहे हैं
लाल चिंटियां।

-अंजनी कुमार

नोट:- प्रस्तुत लेखे में दिये गये विचार या जानकारियों की पुष्टि हरियाणा खास नहीं करता है। यह लेखक के अपने विचार हैं जिन्हें यहां ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है। Poem के किसी भी अंश के लिये हरियाणा खास उत्तरदायी नहीं है।

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