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मैं रोऊंगा नहीं

December 24, 2017 8:45 am by: Category: साहित्य खास Leave a comment A+ / A-

मैं रोऊंगा नहीं

संदीप कुमार 
मैं EVM पर भी आरोप नहीं लगाऊंगा
मैं नहीं कहूंगा वो धोखे से जीते हैं
क्योंकि पूरी चुनावी प्रक्रिया धोखे पर ही टिकी है
मैं बस इतना कहूंगा
इन हार जीतों के गणित को छोड़कर
मैदानों में उतर जाओ
किसान मजदूर महिलाओं के साथ
एक जिंदा संवाद स्थापित करो
वो जागरूक हैं 
इसलिए जागरूकता से काम नहीं चलेगा
उन्हें रास्ता दिखाना होगा
बंद कमरों में बहस करके नहीं
मैदानों में उतर कर 
अगवाई करनी होगी
संघर्षों में कंधे से कंधा मिलाकर लड़ना होगा
लड़ते लड़ते बताना है 
यह भी एक रास्ता है मुक्ति का
कुछ फिर भी कहेंगे 
यह रास्ता सही नहीं है खून बहेगा
फिर उन्हें
आदिम काल से लेकर चीनी क्रांति तक की
कहानी बतानी होगी
यकिन मानिए
लोग सुनने के लिए ही नहीं
लोग लड़ने के लिए भी तैयार हैं
बस एक बार हां एक बार
हुंकार तो भरिए

लेखक परिचय – संदीप कुमार स्वतंत्र लेखक हैं एवं सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता हैं। लेंगिक समानता पर काम करते है। दलित एवं पीड़ितों के हक की आवाज़ के लिये अपने संगठन के माध्यम से उठाते रहते हैं।

नोट:- प्रस्तुत कविता में दिये गये विचार या जानकारियों की पुष्टि हरियाणा खास नहीं करता है। यह लेखक के अपने विचार हैं जिन्हें यहां ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है। लेख के किसी भी अंश के लिये हरियाणा खास उत्तरदायी नहीं है।
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