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सतरंगी की कहानी…. दर्शकों की जुबानी

August 30, 2016 10:24 am by: Category: मनोरंजन खास Leave a comment A+ / A-

Satrangi Poster-A

पगड़ी के बाद सतरंगी फिल्म हरियाणावी सिनेमा के पुनर्जन्म का एक और सराहनीय प्रयास है। निर्देशक संदीप शर्मा के साथ परी टीम ने सतरंगी के प्रचार में बहुत मेहनत की जिसका परिणाम यह है कि आज लगभग हर हरियाणावासी यह जानता है कि कोई हरियाणवी फिल्म बनी है। लेकिन दुर्भाग्य की बात ये है कि सलमान खान की सुल्तान पर सीटी और तालियां ठोकने वाले और टूटी फूटी हरियाणवी के जरिये हरियाणा का मान बढ़ाने के कसीदे गढ़ने वाले दर्शक अपने घर की फिल्म देखने सिनेमाघरों तक नहीं पंहुच रहे हालाकि कुछ जगहों पर अच्छा रिस्पोंस लोगों ने दिखाया है और सिनेमा हॉल की खचाखच भरी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर दिखाई दी हैं। फिर भी सतरंगी अभी दर्शकों की बाट जोह रही है। लेकिन हरियाणावासी फिल्म की अनदेखी कर अभी यह महसूस नहीं कर पा रहे हैं कि वे क्या खो रहे हैं तो आइये आपको दर्शकों के बहाने ही बताते हैं आपने सतरंगी न देखकर क्या मिस किया और अभी भी आप सिनेमाघरों तक जायेंगें तो सतरंगी में क्या पायेंगें।

प्रदीप राठी ने फेसबुक पर रोशन वर्मा की पोस्ट में कमेंट करते हुए सतरंगी की संक्षिप्त समीक्षा प्रस्तुत की जिस पर यशपाल शर्मा और रोशन वर्मा के साथ उनका विमर्श भी छिड़ा उसी संक्षिप्त टिप्पणी को उन्होंने हरियाणा खास के लिये थोड़ा विस्तार दिया है जो इस प्रकार है।

हरियाणवी सिनेमा के सूखे के दौर को खत्म करने वाली फिल्म है सतरंगी

सतरंगी फिल्म शुरू होती है बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के संदेश के साथ , जिसमे बाप बेटी के रिश्ते को खूबसूरती से फिल्माया गया है । फिल्म की नायिका है सतरंगी , फिल्म में हरियाणा की रूढ़िवादी परम्पराओ को तोड़ने का काम किया है , वो हरियाणा जहाँ प्रेम विवाह करने वाली लड़की को झूठी शान की बलि चढ़ा दिया जाता है , सतरंगी फिल्म की नायिका का पिता खुले विचारों का है जो उसके प्रेम विवाह में उसके साथ है , फिल्म में एक किसान के मर्म को भी छुआ है जो अपने बेटे द्वारा पुश्तेनी जमीन बेचने से दुखी है , सतरंगी फिल्म बापबेटी की भावनाओं के ज्वार भाटे से भरी है ।  इंटरवल से पहले पूरी फिल्म बेटी के ऊपर केंद्रित है लेकिन इंटरवल के बाद पूरी फिल्म पुनर्विवाह पर केंद्रित हो जाती है , फिल्म की नायिका अपनी शादी से पहले अपने अकेले पिता की शादी करवाना चाहती है , निर्देशक ने यहाँ ऐसे मुद्दे को छुआ है जिसे हरियाणवी समाज में आज तक खुले तौर पर स्वीकार नहीं किया गया है । फिल्म समाज में बदलाव के बारे में सोचने पर मजबूर करती है  ताकि हम समाज की रूढ़िवादी परम्पराओ को छोड़ कर आगे बढे । सतरंगी फिल्म हरियाणवी सिनेमा में आये सूखे के दौर को खत्म करेगी ।

यशपाल शर्मा , जी का सशक्त अभिनय , फिल्म की नायिका का आत्म विश्वास और सतरंगी के फौजी अंकल की मौजूदगी कहीं भी फिल्म में ठहराव नहीं आने देते , लेकिन नए कलाकारों की हरियाणवी बोली पर कमजोर पकड़ थोड़ा अखरती है , लेकिन जिस तरह हरियाणवी सिनेमा का डोर पगड़ी और सतरंगी के साथ शुरू हुआ है ,उनके मध्यनजर इन बातों को नजरअंदाज किया जा सकता है । फिल्म फूहड़ता से परे और पूरे समय बांध कर रखने वाली है

प्रदीप के साथ-साथ हमने फेसबुक पर जब संदीप शर्मा जी की वॉल की यात्रा की तो उनकी वॉल पर अल्पना सुहासिनी की भी टू द प्वाइंट समीक्षा मिली वे सतरंगी के बारे में क्या कहती हैं आप भी पढ़िये

“है अँधेरी रात पर, दीपक जलाना कब मना है”

आज सतरंगी फिल्म देखी और उसे देखकर ये दावे के साथ कहा जा सकता है कि ‘सतरंगी’ एक ऐसी फिल्म है जिसे एक बार देखकर मन नहीँ भरता वरन बार बार देखने का मन करे…..अद्भुत शानदार अविस्मरणीय अनुभव रहा सतरंगी देखने का और पिछले दो दिन की थकान भी काफूर हो  गई.

1.अगर हरियाणा की नवोदित पीढ़ी हरियाणवी सिनेमा के सार्थक बदलावों की झलक देखना चाहती है तो सतरंगी देखे.

  1. अगर असली हरियाणा देखना चाहते हैं तो सतरंगी देखें ।
  2. अगर वर्तमान व आधुनिक सिनेमा के नाम पर परोसी जा रही फिल्मी फूहड़ता से आजिज आ गए हों और कुछ स्वस्थ मनोरँजन की चाह हो तो सतरंगी देखें ।
  3. अगर दमदार अभिनय और कसावटपूर्ण अभिनय की बानगी देखना चाहते हों तो सतरंगी देखें ।
  4. शानदार फिल्मांकन और मधुर गीत संगीत का रसास्वादन करना चाहते हों तो सतरंगी देखें ।
  5. संदीप शर्मा जी के लाजवाब व नायाब की ऐसी बानगी कि आँखें चुँधिया जाएँ इसलिये सतरंगी देखें।
  6. और अत्यंत महत्वपूर्ण बात कि अभिनय किसे कहते हैं ये जानना हो तो अभिनय पुरोधा यशपाल शर्मा जी बाकमाल, बेहतरीन शानदार अभिनय से सजी सतरंगी देखें और साथ ही नरगिस जी कमाल कमाल कमाल और साथ ही यशपाल जी के बेटे का रोल निभाने वाले किरदार ने गज़ब कर दिया. साथ ही आशिमा शर्मा का इस फिल्म से शानदार आगाज. यशपाल जी हम ताउम्र आपके आभारी रहेंगे हरियाणवी सिनेमा के इस बदलाव के लिये.

इतना ही नहीं वे दर्शकों को कटघरे में खड़ा करते हुए आगे लिखती हैं

और साथ ही हरियाणवी दर्शकों आप भी याद रखियेगा कि हरियाणवी सिने इतिहास आपकी इस धृष्टता को भी हमेशा याद रखेगा जो आप क्षेत्रीय सिनेमा के प्रति उदासीनता दिखाकर कर रहे हैं । हद है हरियाणवी फिल्मों में काम करने की इच्छा सबके मन में है…..लाखों युवा इसके लिये तैयार हैं कि उन्हें हरियाणवी फिल्मों में काम करने का अवसर मिले लेकिन यही लाखों युवा हरियाणवी फिल्म देखने के प्रति उदासीनता दिखाते हैं….हैरत की बात है. अधिकार सब जानते हैं कर्त्तव्यो का आभास किसी को नहीँ ये शर्मनाक स्थिति है.. खैर..यशपाल जी, संदीप जी राजीव भाटिय़ा जी सलाम आप लोगों के जज्बे व हौंसले को…”है अँधेरी रात पर, दीपक जलाना कब मना है”

अल्पना जी की पोस्ट पर पगड़ी के निर्देशक राजीव भाटिया कुछ इस तरह लिखते हैं

I agree with Alpana. She is so sensitive About Haryana. I want our audience to be sensitive in the same way. This is rare chance to prove that we love our cinema n culture. Infect I think its last chance to prove your support. Plz prove urself.

त्रिदेव दुग्गल मुंढालिया लिखते हैं

आज #सतरंगी फिल्म देखी__यशपाल और उनकी पूरी टीम नें जो अभिनय किया है वाकयी जबरदस्त है ___मूवी हर लिहाज से जबरदस्त है ___लेकिन बड़े दुर्भाग्य की बात है कि एक हरियाणवी फिल्म को खुद हरियाणा ही वो प्यार नही दे पा रहा जिसकी वो हकदार है! हरियाणवी संस्कृति के लिए इससे शर्मनाक बात क्या होगी कि मै जिस सिनेमा में ये मूवी देख रहा था__उसमे मेरे अलावा सिर्फ 13 शख्स ही मूवी देख रहे थे ! और सिनेमा भी उस शहर का_ जहाँ यशपाल जी पल बढ़कर बड़े हुए !! बस एक सवाल दिल में बार बार सुई सी चुभो रहा है कि क्यों हम अपनी संस्कृति से मुँह मोड़कर विदेशी मूवीज़ के फैन होते जा रहे हैं ?? आप नें सलमान शाहरूख आमिर इत्यादि की काफी फिल्में देखी होंगी पर एक बार ये हरियाणवी मूवी जरूर देखें ___मुझे नही लगता कि ये मूवी आपको किसी बालीवुड या हॉलीवुड की बड़े बजट की फिल्म से किसी भी तरीके से कम मिलेगी !! हर लिहाज से उनसे इक्कीस मिलेगी !! जय हरियाणा जय हरियाणवी !!

टिप्पणियां तो और भी बहुत हैं कुछ आप नीचे दिये गये लिंक में सुन भी सकते हैं लेकिन हमें लगता है अभी भी देर नहीं हुई है आप सिनेमाघरों तक अब भी जा सकते हैं देखने के बाद अगर खामियां लगती हैं तो उनकी आलोचना भी कर सकते हैं ताकि आगे सावधानियां रखी जा सकें।

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