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सामण की रुत हे मां मेरी आ रही

तीज त्यौहार और उत्सवों का महीना है सावन

July 1, 2016 10:45 am by: Category: धरोहर खास Leave a comment A+ / A-

-सोनिया सिंह जांगड़ा

सावन का महीना बहुत ही रोमांटिक महीना होता है, हर दिल में अहसास उमड़ने लगते हैं। असल में सावन के महीने को प्रेम की रुत कहा जाये तो कोई दो राय नहीं। देश भर में इस महीने को लेकर उत्साह का माहौल होता है तो यह महीना धार्मिक रुप से सामाजिक रुप से भी काफी व्यस्त होता है। क्योंकि इसी महीने में आता है एक ऐसा त्यौहार जिससे शुरु हो जाता है उस्तवों के मनाने का सिलसिला।

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चित्र: हरिवंदर मलिक जी की फोटो कलेक्शन से साभार

सावन महीना जुलाई की 20  तारीख से शुरु होने वाला है, सामण के शुरु होने से पहले ही हमारी बडी बडेरी कितनी राजी होवैं हैं इस बात का अंदाजा हम नहीं लगा सकते,  कुछ ऐसी ख्वाईश जो पूरी होने वाली हैं और कुछ ऐसी मेहनत जिसका फल इसी रुत मे मिलना है।

कोथली, सिंधारा का सारा सामान ये पहले ही इकट्ठा कर लेती हैं, यो हरा सूट ..ए बेबे जमा जोर का लगेगा मेरी बेटी के, यो एक सासु का कर दयु, दिखे कमी नही होणी चाहिए। ये आत्मा और दिल से निकले शब्द हर माँ के मुख पर सुनाई देंगे, इस महीने मे तीज, शिवरात्रि, रक्षा बंधन, गुप्त नवरात्रे त्यौहार अपनी छटा बिखेरते हैं, खास बात तो यही कह सकते हैं कि ये महीना प्रेम, स्नेह और उल्लास से परिपूर्ण होता हैं। झूलों से लबालब बाग, अब तो कहां देखने को मिलते हैं, एक बगड़ के साथ एक ही पिंग (झूला) मिलेगी, सुहाली, पूड़े, मलपुढे, गुलगुले ये सब भी कम ही बनते देखेते हैं अब तो,  इनकी जगह शायद नई चीजो मे सिमट गयी हैं। इस महीने में गाये जाने वाले गीतों की आवाज भी गहराई से प्रभाव डालती हैं। हर शब्द हर भाव मे कुछ न कुछ अनूठा होता हैं, वो जो महसूस कर रहे हैं, वो जो हमारी खुशी का माध्यम है सब बयां करते हैं ये गीत….

पी पी पपीहा बोल्या बाग म्हं, तेरा पिया के सा बोल रे,

रे ए पपीहा बैरी, न्यू मत बोलै रे गजबी बाग म्हं

न्यू मत बोलै रे जुल्मी बाग म्ह।

 

सामण की रुत आई रे देखो सामण की रुत आई,

घने दिना के बाद राम जी तने या झड़ी लगाई,

 

चोगरदे की हरयाली, घेवर पतासया की मीठी खुशबू, रक्षा बन्धन प घर कुनबे का मिलाप, शिवरात्रि प बम बम की गूंज, किते सत्संग तो किते बगड़ म्ह भजनों की आवाज का रस,  बेसब्री से इंतजार है… इस महीने का, हरियाली से परिपूर्ण इस रुत का… सामण की रुत हे मां मेरी आ रही…..।

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(लेखिका जनसंचार एवं पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी कर स्वतंत्र रुप से लेखन कार्य कर रही हैं)

सामण की रुत हे मां मेरी आ रही Reviewed by on . -सोनिया सिंह जांगड़ा सावन का महीना बहुत ही रोमांटिक महीना होता है, हर दिल में अहसास उमड़ने लगते हैं। असल में सावन के महीने को प्रेम की रुत कहा जाये तो कोई दो रा -सोनिया सिंह जांगड़ा सावन का महीना बहुत ही रोमांटिक महीना होता है, हर दिल में अहसास उमड़ने लगते हैं। असल में सावन के महीने को प्रेम की रुत कहा जाये तो कोई दो रा Rating: 0

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