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छात्र जब भी जागा है, इतिहास ने करवट ली है…

September 26, 2016 9:49 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

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सिरसा का राजकीय नेशनल स्नातकोत्तर महाविद्यालय (GNC) कॉलेज कैंपस में हुए गोलीकांड की वजह से सुर्खियों में है। हम अपने छात्र संगठन SFI की जिला कमेटी की ओर से कॉलेज परिसर में हुई इस घटना पर गहरा दुख, अफ़सोस, विरोध और फ़िक्र व्यक्त कर रहे हैं। नेशनल कॉलेज का एक शानदार इतिहास रहा है। इस कॉलेज से पढ़कर गये हज़ारों विद्यार्थियों ने अपने अपने फिल्ड में नाम कमाया है । इस कॉलेज के छात्र संघों से निकलकर गये बहुत से साथी आज कई राजनितिक पार्टियों में अग्रणी भूमिकाओं में हैं। हम इस घटना के मद्देनजर कुछ सवालों पर चर्चा करना चाहते हैं। छात्र संघ चुनाव दोबारा शुरू होने की अटकलों के बीच सिरसा में छात्र गुटों की बाढ़ सी आ चुकी है। जिनका ना कोई संविधान है, ना कोई कार्यक्रम। ना छात्र मुद्दों और शिक्षा नीति पर कोई समझ है। ये स्वंयभू नेता जात, गोत्र, धर्म,इलाका और चौधर की राजनीती को मद्देनजर रखते हुए छात्रों को लामबंद कर रहे हैं। छात्रों का संगठित होना शुभ संकेत है, पर अफ़सोस की बात है कि इन तथाकथित छात्र गुटों को आम विद्यार्थियों की बुनियादी दिक्कतों से कोई मतलब नहीं है।बात बात पर निर्दोष छात्रों से मारपीट, लड़कियों से छेड़खानी और कमेंटबाजी, गाड़ियों और बाइक्स पर सारा दिन चक्कर लगाना, ये अपना बुनियादी अधिकार समझते हैं। सारा दिन लड़ाई और हथियारों की प्रशंसा करने इनको अच्छा लगता है।कॉलेज परिसर में हथियार ले के आने में इनको गर्व महसूस होता है। यहां पर सवाल यह है कि छात्र समुदाय इस तरफ जा क्यों रहा है?  छात्र जब भी जागा है, इतिहास ने करवट ली है। हमारा छात्र संगठन SFI अपने गठन से लेकर आजतक विद्यार्थियों की मांगों और मुद्दों को लेकर लगातार संघर्षरत रहा है, हमने कॉलेज परिसरों में गुंडागर्दी और छेड़खानी के विरोध में हमेशा संघर्ष किया है। हमारे दो राज्य प्रधान विद्यार्थियों के वेश में लम्पट और आवारा तत्वों द्वारा किये गए हमलों में अपनी शहादत दे चुके हैं। इसके बावजूद हम कह रहे हैं कि इसमें उन छात्रों का कोई कसूर नहीं है जो इन दिशाहीन छात्र गुटों की राजनीती का जाने अनजाने हिस्सा बन रहे हैं। अब हम मूल बात पर आते है, असल में 1991 से सरकार नयी आर्थिक नीतियां लेकर आई, जिनका मकसद देश को पूंजीवाद की तरफ धकेलना था और सार्वजानिक समाजवादी प्रबंध खत्म करना था। और ऐसा संगठित छात्र आंदोलन के चलते संभव नहीं था। फिर सरकार ने पूंजीवादी सिस्टम के साथ मिलकर छात्रों की क्रान्तिकारी चेतना पर हमला बोला और योजनाबद्ध तरीके से शिक्षा पर सरकारी खर्च कम किया गया। सिलसिलेवार छात्र संघों के चुनाव पर रोक लगाई गई। फिल्मों, गीत, संगीत और और तमाम जनसंचार के माध्यम से क्रिकेट, क्राइम, सेक्स की संस्कृति को बढ़ावा दिया गया। आजकल पंजाबी गानों में जिस तरीके से युवाओं को पेश किया जा रहा है, वो हमारे सामने है। छात्रों के बड़े हिस्से को नशे में डुबो दिया गया। और आज इस घटना के बाद नेशनल कॉलेज को इस तरीके से दिखाया जा रहा है, जैसे वहां बदमाश रहते हों। पर बुनियादी बातों पर कोई गौर नहीं कर रहा। नेशनल कॉलेज में 100 शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। पुस्तकालय में बैठने के लिये जगह नहीं है। कैंटीन की उचित व्यवस्था नहीं है। खेल मैदान में जंगल की तरह घास ऊगा हुआ है। कॉलेज में बुनियादी सुविधाएं नहीं है। तमाम आंदोलनों और ज्ञापनों के दिए जाने के बावजूद सरकार और कॉलेज प्रशासन चुप है। पिछले महीने की 21 तारीख को हमने इन सभी मांगों और मुद्दों को लेकर कॉलेज प्रशासन से विस्तृत बातचीत की थी। हमने प्रिंसिपल महोदय को बाकायदा कहा था कि कॉलेज का माहौल खराब हो रहा है। आप सभी छात्र संगठनों को बुलाकर बातचीत कीजिये। पर वो हाथ खड़े कर गए। प्रिंसिपल की कार्यप्रणाली पर छात्र आंदोलन के दवाब में जाँच चल रही है। प्रिंसिपल ने कॉलेज के एक विकलांग प्रोफेसर को टुंडा कह कर संबोधित किया था। और ऐसी अव्यवस्था में परिसर में माहौल का ख़राब होना समझा जा सकता है। अजीब विड़बम्बना है कि चौकीदार चोर हो गए हैं। हम आसानी से समझ सकते हैं कि शासन और प्रशासन छात्रों की एकता से डरता है। सरकार नहीं चाहती की युवा पढ़े। सारे के सारे महकमे प्राइवेट किये जा रहे है। रोजगार कही है नहीं। सरकार समझती है कि इस से पहले की छात्र एकजुट होकर अपने शिक्षा और रोजगार के अधिकार के लिए लड़ें, इनको एक दूसरे के खिलाफ खड़ा करदो। हमारी साफ़ समझ है कि विद्यार्थियों का संगठित और व्यापक आंदोलन ही इस वक़्त छात्र अधिकारों की हिफाज़त कर सकता है इसलिए देश का सबसे बड़ा छात्र संगठन होने के नाते हम SFI के लोग संघर्ष के मैदान में है। जिन दो छात्रों अमनदीप और रविंदर को गोली लगी है।हम उनके जल्दी ठीक होने की कामना करते है और आरोपी लोगों के खिलाफ कार्यवाही की मांग करते हैं। हम अपील करते है कि दिशाहीन छात्र राजनीति को समझें। एक दुसरे पर गोलियां चलाना बन्द करो। संगठन बनाओ। अपने मांग और मुद्दे उठाओ ,आपसी संवाद स्थापित करें। भगत सिंह का जन्म दिन आ रहा है। उन्होंने लाहौर हाइकोर्ट में 1930 में बयान दिया था,”पिस्तौल और बम कभी इंक़लाब नहीं ला सकते, इंक़लाब की तलवार की धार विचारों की शान पर तेज होती है।

हमजिंद्र सिंह संधु, छात्र नेता, एसएफआई

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