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खून खौलता है मोदी जी

September 20, 2016 12:19 am by: Category: साहित्य खास Leave a comment A+ / A-

shahid

जब-जब भी देश के तमाम दिलों आघात करने वाली घटनाएं होती है। तो कवियों का दिल भी खौल उठता है। ऐसे प्रस्फुटन होता है… या तो आंसुओं का… या फिर रचनाओं का… कोई युद्ध की चुनौति की ललकार रखता है तो हालातों पर प्रहार करता है। कुछ इसी तरह के भाव उरी में सैन्य बेस पर हुए हमलों को लेकर जिसमें… 17 और एक 18 जवान शहीद हुए…

 

खून खौलता है मोदी जी

मुश्किल देश का जीना हो गया

छलनी छलनी सीना हो गया
वो खून की होली खेल रहे हैं
हम बार बार क्यूं झेल रहे हैं
हाथ बंधे हैं क्यू वीरो के
लक्ष्य रुके हैं क्यूं तीरो के
मां के आंचल सूने हो रहे
दर्द दिलो के दूने हो रहे
कंधे टूट रहे है बापो के
घड़े भर रहे हैं पापों के
बच्चो के छिन रहे है साये
दिये बुझा रही हैं हवाये
उजड़ रहीं है मांग सिंदूरी
ऐसी भी है क्या मजबूरी
आप अड़े हो बातचीत पे
निंदा करते हो ट्वीट पे
बार बार नफरत की भाषा वो क्यूं बोलता है मोदी जी
खून खौलता है मोदी जी..अब खून खौलता है मोदी जी

सारे देश में हाहाकार है
जन जन की बस यही पुकार है
बात चीत को अब रहने दो
बात बारूदो को कहने दो
खून का बदला लेना होगा
जवाब पलट कर देना होगा
दुश्मन कोई बच ना पाए
चाहे उनके घर कयामत आए
घर में हमारे आग लगाई
कैसे होगी अब समाई
उठाओं ईंट के बदले पत्थर
लाओ सतरा के बदले सत्तर
मिटिंग विटिंग बंद करो अब
दुश्मन का प्रबंध करो अब
बार बार हमको हल्के में वो क्यों तोलता है मोदी जी
खून खौलता है मोदी जी..अब खून खौलता है मोदी जी

बाते बड़ी बड़ी करते हो
फिर लड़ने से क्यूं डरते हो
दिखाओ 56 इंच का सीना
बच सके ना जो कोई कमीना
दम नही है तो रहने दो
देश सहता है तो सहने दो
सुधार ना सके जो तकदीर को
तो उन्हे ही देदो अब कश्मीर को
सहनशील नही कायर है हम
बस हवाओं के फायर है हम
असली सीना तो वो दिखाते हैं
जो घर में घुस कर मार जाते हैं
कभी बैठेंगे एक साथ हम
मिलकर करेंगे मन की बात हम
जख्मी हो गए शब्द शब्द अब हाथ डोलता है मोदी जी
खून खौलता है मोदी जी..अब खून खौलता है मोदी जी

-कवि इन्द्रजीत

 

ट्रेंडिंग देशभक्ति

आज सत्तरा उरहानै मरगे

तड़कै सत्तर की लाश परहानै भेजी जागी

उरहानै

यूपी, महाराष्ट्र, झारखण्ड, बिहार, राजस्थान मैं

रोहवां राट माच री है

न्यूनै

लाहौर, इस्लामाबाद, कराची मैं

बिलखते परिवार शवां नै माटी देंगें

कुछ दिन पाछै

दोनूं देसां के नेता मीटिंग बलावैंगे

अर हाथ मिलाके बतळांदे पावैंगे

इतणै मैं फेसबुक ट्विटर पै भी

सन्नी लियोनी की नयी फिल्म का पोस्टर

या फेर विराट का बल्ला

किसे बाबा की बदजबानी

या किसे पाकिस्तानी मॉडल की उसकै भाई कै हाथ होई हत्या

हैशटेग गेल्याँ रैंक करण लाग ज्यागी

दोनूं देशां मैं देशभक्ति

इतनै आपणे आपणे झंड़याँ मैं लिपटी ल्हास आण की बाट देखैगी

-जगदीप सिंह

 

चलो युद्ध करो

क्यों इतना हो हल्ला कर रहे हो

देश के लिए कुर्बान होना फक्र की बात होती है

वे मरे नहीं हैं वीरगति को प्राप्त हुए हैं

पेंशन देगी सरकार

मुआवज़े भी

वन रैंक वन पेंशन कितना कुछ तो किया ह सरकार ने

दिखाई नहीं देता

क्या कहा बदला

हाँ हम बदला लेकर रहेंगें

सही समय पर और सही जगह पर लेंगे

2019 में अभी थोड़ा समय है

ये माहौल तब तक बनाये रखो

क्या कहा आतंकी अंदर कैसे घुसे

यंहाँ देश के जवान शहीद हो रहे हैं तुम सवाल पूछ रहे हो

उस समय कंहाँ थे जब पठानकोट हुआ था

क्या तब भी पूछा था जवाब नहीं मिला

ये ज़रूर कोई देशद्रोही है

जो इतने सवाल पूछता है

हमारे सैनकों की शहादत पर सवाल उठा रहा है

देखो कहता है हमारी लचर नीतियों के कारण ऐसा होता है

खुफिया तंत्र की कमजोरी सामने आती है

कुछ घर के भेदी लंका ढाने पर तुले हैं

नहीं ऐसा नहीं है हम पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देंगें

हम उसे दुनिया के सामने नंगा कर देंगें

देखो हम पूरी दुनिया से दोस्ती बढ़ा रहे हैं

कुछ चाणक्य के सैम दाम भेद चला रहे हैं

दंड अभी बचा रखा है

सही समय पर सही जगह पर उसका इस्तेमाल किया जायेगा

मित्रों ये मेरे देश के शहीद ही हैं

जिनकी बदौलत आज हम चैन की नींद सोते हैं

सत्रह के बदले हम सत्तर क्या सत्तरह हजार लेकर आयेंगे

लेकिन बिगुल बजने दो

फिर देखना रैलियों में कैसे उमड़ता है मेरा हृदय

सुनना मन की बात में कैसे भर आएगा मेरा गला

दूध मांगोगे तो खीर देंगे

कश्मीर मांगोगे तो चीर देंगे

अब ये आर पार की जंग होकर रहेगी मित्रों

चलो युद्ध करो

कारगिल में हुआ कफ़न का क़रार अधूरा है

-जगदीप सिंह

सहानुभूति

ये शव, दरअसल शव नहीं
डिस्पोजल है
चाय-चर्चा करते दो मुल्कों के गिराये हुए
सिगरेट है
आधी पीने के बाद
एस्ट्रे के हवाले कर दी गई,

आश्वासनों की लाश कहती हूँ मैं इन्हें
माँएँ रो लेंगी
क्या फर्क पड़ता है?
कब फर्क पड़ता है ग़र चूड़ियाँ फोड़ लें
मिरे गाँव की
तमाम सुहागिनें…

थम गया रवीश का प्राइम टाइम
आओ फिर से
चाय पर करें चर्चा
फिर चद्दर भेजें, साड़ी मंगवाएं
आओ…
आओ तुम भी,
बहुत जनसंख्या है देश में…

-एस.एस.पंवार

 

 

 

 

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