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आह्वान

November 21, 2017 11:26 am by: Category: खबर खास, साहित्य खास Leave a comment A+ / A-

मेरे देश के नौजवानों सच्चाई को समझो
दुश्मन को पहचानो
शांति सेना का नहीं
जनसेना का निर्माण करो।।

सन्दीप कुमार अपनी कविता के माध्यम से आवाज उठा रहे है कि रोजाना हो रहे सैनिको और आदिवादियो, कश्मीरियों, पूर्वांचलियों के बीच आपसी युद्ध जो सीधा-सीधा लुटेरे सामंतीयों-पूंजीपतियों के फायदे के लिए, उनके ही इशारे पर शांति स्थापित करने के लपादे में जो चल रहा है। देश के नोजवान से आह्वान कर रहे है कि मजदूर-किसान के बच्चों को आपस मे खून बहाने की बजाए दुश्मन लुटेरे सामन्त और पूंजीपति के खिलाफ जल-जंगल-जमीन को बचाने के लिए इकठ्ठा होकर लड़ना चाहिए।

 

आह्वान

वो शांति की बात करने आते हैं
शांति सेना के साथ
शांति सेना कभी भी
फूल लेकर मैदान में नहीं उतरी
उसने हमेशा लौहे की नली से
गोलियां बरसाई हैं
दहश्त पैदा की है

गोलियां अनपढ़ होती हैं
वो सीधी चलती हैं
उसे कोई फर्क नहीं पड़ता
सामने बच्चा है या बूढ़ा
वो सीने को चीरकर निकल जाती है
लाशों की संख्या बढ़ती ही जाती है
शांति सेना भेजने वाले
जश्न मनाते हैं
वो लाशों की संख्या गिनते हैं
वो नहीं सोचते ?
आज जो बच्चे, बूढ़े गोली का शिकार हुए हैं
कल उन्हीं घरों से न्याय की गूंज उठेगी
जब न्याय कहीं नहीं मिलेगा
तब उन हाथों में
बंदूक आ जाए
तो कोई ताजूब की बात नहीं.

वो सोचना ही नहीं चहाते
क्योंकि वो जानते हैं
अच्छी तरह जानते हैं
हमारी शांति सेना में मरने वाले
उन्हीं के घरों से हैं

मेरे देश के नौजवानों सच्चाई को समझो
दुश्मन को पहचानो
शांति सेना का नहीं
जनसेना का निर्माण करो
हमारे दुश्मन वही है
जो गोल गुंबज में बैठे हैं
जहां से मवाद बहता ही जा रहा है
दुर्गंध बढ़ती ही जा रही है
आओ मिलकर इस गंदगी को साफ करें।।

 

लेखक परिचय – संदीप कुमार स्वतंत्र लेखक हैं एवं सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता हैं। लेंगिक समानता पर काम करते है। दलित एवं पीड़ितों के हक की आवाज़ के लिये अपने संगठन के माध्यम से उठाते रहते हैं।

नोट:- प्रस्तुत कविता में दिये गये विचार या जजानकारियों की पुष्टि हरियाणा खास नहीं करता है। यह लेखक के अपने विचार हैं जिन्हें यहां ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है। लेख के किसी भी अंश के लिये हरियाणा खास उत्तरदायी नहीं है।

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