Tuesday , 24 October 2017

Home » शख्सियत खास » सर छोटूराम: कैसे बने राम रिछपाल से रहबर ए आजम

सर छोटूराम: कैसे बने राम रिछपाल से रहबर ए आजम

February 1, 2017 1:44 am by: Category: शख्सियत खास 1 Comment A+ / A-

रहबर ए आजम, दीनबंधु, सर, चौधरी छोटूराम शारीरिक रूप से छोटे से कद के इस व्यक्ति के व्यक्तित्व का कद बहुत बड़ा था। वे दीन दुखियों गरीबों के बंधु, रहबर ए आज़म, अंग्रेजी हुकूमत के लिये सर तो किसानों के लिये चौधरी छोटूराम मसीहा थे। चौधरी छोटूराम का जन्म वैसे हुआ तो 24 नवंबर 1881 को था लेकिन हर वर्ष बसंत पंचमी के दिन को उनके जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। उनका जन्म वर्तमान हरियाणा के झज्जर जिले के गांव गढ़ी सांपला में हुआ था जो उस समय संयुक्त पंजाब का हिस्सा होता था रोहतक के अंतर्गत पड़ता था। इनका वास्तविक नाम था राय रिछपाल लेकिन परिवार में सभी प्यार से छोटू कहकर पुकारते थे फिर स्कूल के रजिस्टर में भी जाने-अंजाने इनका नाम छोटूराम ही दर्ज कर लिया गया और यहीं से बालक राय रिछपाल का वास्तविक नाम छोटूराम हो गया।

यदि इनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो जमीन तो इनके दादा रामरत्न के पास 10 एकड़ थी लेकिन वह दस एकड़ आज की एक एकड़ जितनी पैदावार भी नहीं कर पाती थी ऊपर से इनकी जमीन तो और भी बंजर व बारानी थी। इनके पिता बस नाम के ही सुखीराम थे उनकी जिंदगी कर्ज और मुकदमों में ही उलझकर रह गई थी।

छोटूराम जी की शिक्षा दीक्षा

चौधरी छोटूराम की आरंभिक शिक्षा देर से शुरु हुई दस साल की उम्र में उन्होंने पढ़ना शुरु किया मीडिल तक झज्जर में पढ़े। छोटूराम पढ़ने में होशियार थे आगे पढ़ना भी चाहते थे लेकिन फीस की अन्य खर्चों की चिंता भी थी। पिता सलाह के लिये महाजन के यहां जा पंहुचे। उन्होंने कहा कि बहुत पढ़ लिया कहीं पटवारी पटवूरी सिपाही सीपूही की नौकरी दिला दे इसको। चौधरी छोटूराम ने इस तरह के व्यवहार से खुद को व अपने पिता को अपमानित महसूस किया। जैसे तैसे अपने चाचा राजाराम की मदद से वे क्रिश्चियन मिशन स्कूल में आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिये दाखिल हो गये। इनकी बुद्धि को देखकर वहां इनकी फीस भी माफ हो गई और छह रूपये प्रति माह छात्रवृति भी मिलने लगी।

यहां छोटूराम छात्रावास में रहते थे लेकिन छात्रावास का सफाई कर्मचारी अपने काम को सही से नहीं करता था। चौधरी छोटूराम ने छात्रों को साथ लेकर वार्डन से इसकी शिकायत कर दी। लेकिन वार्डन के कान पर जूं तक न रेंगी फिर तो उन्होंने छात्रों को साथ लेकर हड़ताल करवा दी तब जाकर उनकी मांग पूरी हुई। अपनी मांग मनवाने और छात्रों का नेतृत्व करने के कारण छात्र इन्हें जनरल रॉबर्ट पुकारने लगे।

कुल मिलाकर अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाना उन्होंने सीख लिया था। यहां से इंटरमीडियेट परीक्षा उन्होंने पास की।

कहते हैं इसके बाद एक बारगी तो आगे पढ़ने के रास्ते बंद नजर आ रहे थे लेकिन सेठ छाजू राम से अचानक रेल में हुई इनकी मुलाकात इनके लिये बहुत फायदेमंद रही क्योंकि इसी मुलाकात में ये अपनी आर्थिक परेशानी उनके सामने रख पाये और सेठ छाजू राम ने इनकी पढ़ाई का खर्च वहन करने का वचन दिया। इसके बाद तो इन्होंने सैंट स्टीफन कॉलेज से स्नातक और उसके, दयानंद ऐंग्लो वैदिक कॉलेज से संस्कृत का ज्ञान लिया, इलाहाबाद के आगरा कॉलेज से इन्होंने वकालत की पढ़ाई पूरी की। इस बीच कुछ समय तक इन्होंने राजा रामपाल के यहां नौकरी भी की, हिंदुस्तान समाचारपत्र का संपादन भी किया। वकालत की शिक्षा पूरी करने तुरंत बाद अभ्यास आरंभ कर दिया। यहीं से इनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत भी हुई। जाट सभा का गठन, जाट गजट नामक पत्र का प्रकाशन, रोहतक से कांग्रेस के प्रथम जिलाध्यक्ष यही बनें, 1920 में असहयोग आंदोलन से असहमत होने के चलते कांग्रेस को अलविदा कह दिया, जमींदारा पार्टी खड़ी की चुनाव भी जीते, सर सिकंदर हयात खान के साथ मिलकर यूनियनिस्ट पार्टी का गठन किया।

यह ऐसा समय था जब छोटूराम अंग्रेजों के साथ खड़े थे। आलोचक आज भी उनकी इस कारण आलोचना करते हैं। लेकिन चौधरी छोटूराम की असहमति की भी वजहें थी जिनमें से उनके अनुयायी प्रमुख यही मानते हैं कि छोटूराम असहयोग आंदोलन को किसानों के हित में नहीं मानते थे। वे सांविधानिक रूप से अंग्रेजों के विरूद्ध लड़ाई लड़ने के पक्ष में थे। जब पंजाब के चुनाव में युनियनिस्ट पार्टी को भारी बहुमत मिला और छोटूराम सरकार में राजस्व मंत्री बने तो उन्होंनें किसान, मजदूर व पीड़ित तबकों को राहत दिलाने के लिये कई कानून बनवाये।

साहूकार पंजीकरण एक्ट – 1938

गिरवी जमीनों की मुफ्त वापसी एक्ट – 1938

कृषि उत्पाद मंडी अधिनियम – 1938

व्यवसाय श्रमिक अधिनियम – 1940

कर्जा माफी अधिनियम – 1934

प्रमुख हैं। इसके अलावा भाखड़ा बांध परियोजना को सिरे चढ़ाने का श्रेय भी चौधरी छोटूराम को ही दिया जाता है।

हरियाणा खास हरियाणा की माटी के इस लाल व युनियनिस्ट यौद्धा को सलाम करता है।

सर छोटूराम: कैसे बने राम रिछपाल से रहबर ए आजम Reviewed by on . रहबर ए आजम, दीनबंधु, सर, चौधरी छोटूराम शारीरिक रूप से छोटे से कद के इस व्यक्ति के व्यक्तित्व का कद बहुत बड़ा था। वे दीन दुखियों गरीबों के बंधु, रहबर ए आज़म, अंग रहबर ए आजम, दीनबंधु, सर, चौधरी छोटूराम शारीरिक रूप से छोटे से कद के इस व्यक्ति के व्यक्तित्व का कद बहुत बड़ा था। वे दीन दुखियों गरीबों के बंधु, रहबर ए आज़म, अंग Rating: 0

Comments (1)

  • Dharmvir

    इस प्रकार के विभिन्न अवसरों पर हरियाणा खास खास लोगों के बारे में खास जानकारी उपलब्ध करवा रही है। बहुत अच्छा प्रयास है चौधरी सर छोटू राम के विषय में लेख पढ़ा बहुत आनंद आया बहुत उम्दा जानकारी दी गई है। इसके लिए हरियाणा खास को साधुवाद।

Leave a Comment

scroll to top