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सुखना के सुख को निगल रही है जंगली घास

September 7, 2016 10:43 pm by: Category: खबर खास, धरोहर खास Leave a comment A+ / A-

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सुखना लेक… या सुखना झील… एक झील… जो कुदरत की दास्तां कहती है… एक झील… जो देहात के लोगों में भी सागर के ख़ाब पैदा करती है… एक झील… जो आनंद की पराकाष्ठा को आंखों से नापने का बिंब प्रदान करती है… एक झील… जो बसी है हर किसी सैलानी हृदय के मीठे से कोने में… देश, विदेश, गांव-देहात या किसी भी स्थान से आए यायावरों को लुभाने वाली ये चंडीगढ़ की वो सुरम्य जगह है जो शिवालिक पर्वत श्रृंखला के ठीक पैरों में बनी है।

इस मानव निर्मित झील का इलाका करीब 3 किलोमीटर तक फैला हुआ है। आपको बता दें कि इस झील का निर्माण साल 1958 में शिवालिक पहाड़ी के नीचे आने वाले पानी पर बांध बनाकर किया गया। नंगी  आंखों पर सुंदरता का चश्मा पहना देने वाली इस झील का प्राकृतिक सौंदर्य एक बड़ी संख्या में पैदल चलने वालों, फोटोग्राफरों, पेंटरों और सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। चंडीगढ़ की इस सुखना झील में एशियन नौकायन चैंपियनशिप का भी आयोजन किया जाता था।

रोइंग और याटिंग चैनल के रूप में प्रसिद्ध

एशिया के सबसे लंबे रोइंग और याटिंग चैनल के रूप में भी इस झील को प्रसिद्ध माना जाता है। तो वहीं ये झील स्कीइंग, सर्फिंग और स्कलिंग जैसे अन्य वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों के लिए भी काफी लोकप्रिय है। ठंड के दौरान यहां विदेशी प्रवासी पक्षियों की भी बड़ी तादात देखने को मिलती है जिससे ये बर्डवाचिंग के लिए भी एक आदर्श स्थान बन जाता है। झील के निर्मल वातावरण में आप पिकनिक, बोटिंग और मेडिटेशन के लिए भी जा सकते हैं।

बतखें लुभाती हैं यात्रियों को

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कुदरत की सुहानी वादियों में अपने छोटे-छोटे पंजो से जमीन नापने वाली बतखें भी यहां आए बच्चों का विशेष ध्यान खींचती है। यहां आने वाला हर सैलानी इन बतखों के साथ अपनी यादें कैद कर जरूर ले जाता है। बाहर से आए यात्री इन बतखों के लिए खाद्य वस्तुएं भी खरीदते हैं। किनारे पर आई बतखें बच्चों का भी ध्यान अपनी ओर आकृष्ठ करती है।

एक दुखदायी वाकया

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साल 2014 में बतखों को लेकर एक बेहद पीड़ादायी वाकया घटित हुआ। दरअसल बर्ड फ्लू की संभावना के चलते झील की सारी बतखों को मार दिया गया था।  हुआ कुछ यूं कि यहां पर एक-दो बतखों की मौत हो गई थी जिसके बाद यहां बर्ड फ्लू की संभावना जताई गई। जिसके बाद बतखों को मार दिया गया। एक बार के लिए पूरी झील सूनसान हो गई थी। यहां पर आने वाले यात्रियों पर भी रोक लगा दी गई थी। काफी समय के बाद स्थिति सामान्य हुई।

वीड़ हटाने के आदेश

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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सुखना झील को बचाने के लिए यहां के प्रशासन को एक सप्ताह के अंदर- अंदर वीड़ हटाने के आदेश दिए हैं। आपको बता दें कि यहां वीड़ के आने का कारण जानने व इसे हटाने के लिए कई बार स्टडी तक भी करवाई जा चुकी है मगर प्रशासन आज तक ये काम नहीं कर पाया।

मछलियां छोड़ने के आदेश

मालूम हो कि इससे पहले एक तरह की मछलियों को सुखना में छोड़ने की योजना बनाई गई जो इस जंगली घास को खाती है। लेकिन बाद में ये जानकारी प्राप्त हुई कि मछलियां इस घास को नहीं खाती, जिसके बाद योजना रद्द कर दी गई।

स्वच्छता के अन्य प्रयास

वहीं सुखना की गाद निकालने के लिए के लिए करीब 5 करोड़ रुपए से मशीन खरीदने की तैयारी भी की गई जिसके लिए अफसर श्रीनगर तक घूम आए। आपको बता दें कि मशीन से सुखना में आए जंगली घास को भी निकालने की तैयारी थी। लेकिन इस खर्चे को लेकर लेकर प्रशासन ने बिलकुल हाथ नहीं बढाए और समस्या ज्यों की त्यों बनी रही। भले ही सुखना आज प्रशासन की बेरूखी और सरकार की उपेक्षा पर अपनी बदहाली के आंसू बहा रही हो, मगर आज भी प्रशासन सुखना की छाती पर नाव चलाकर कमाई कर रहा है, और लोग सुखना की उदासी में भी अपने लिए खुशी के लम्हें ढूंढ लेते हैं।

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