Tuesday , 24 October 2017

Home » खबर खास » स्वर्ण जयंती समारोहों के लिए तैयार हैं हम…

स्वर्ण जयंती समारोहों के लिए तैयार हैं हम…

November 4, 2016 5:50 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

swarn-jayanti-haryana

हरियाणा और पंजाब अपने-अपने गठन के स्वर्ण जयंती वर्ष को मनाने का श्रीगणेश कर चुके हैं। पंजाब से अलग हरियाणा राज्य का गठन सन् 1966 में पहली नंवबर को किया गया था। देसां में देस हरियाणा, जित दूध-दही का खाना। इस राज्य की पहचान चली आ रही है। गीता के संदेश से कुरुक्षेत्र विश्व भर में पहचाना जाता है। अर्जुन के रथ के सारथी बनकर श्रीकृष्ण ने बिना कोई हथियार उठाए, सिर्फ सलाहकार के रूप में महाभारत का युद्ध जीतने में भूमिका निभाई। जिधर श्रीकृष्ण होते, जीत उसी पक्ष की होनी थी। विश्वभर में गीता का संदेश दिया गया कि न्याय के लिए चाहे कोई अपना हो या पराया, युद्ध लडऩा ही अवश्यंभावी है। कुरुक्षेत्र के पानीपत की लड़ाइयां भी इतिहास में दर्ज हैं। पानीपत क्षेत्र में अब भी मराठा वंशज रह रहे हैं। हिसार के गुजरी महल की प्रेम कहानी भी ताजमहल के निर्माण जैसी है पर गुजरी महल जीवित गुजरी के लिए बनाया गया था। जबकि ताजमहल को शाहजहां ने मुमताज के लिए बनवाया था। हरियाणा के पंजाब में शामिल होते हुए भी इसकी अलग पहचान और अलग गठन की मांग उठती ही रही। आखिरकार पंजाब से इस प्रदेश को अलग करके हरियाणा बना दिया। पंजाब तो लाहौर के समय भी पंजाब ही था पर भारत-पाक विभाजन में अलग पंजाब रह गया, जिसकी आज तक राजधानी नहीं है। पंजाब व हरियाणा की विधानसभा अलग हो गई पर राजधानी चंडीगढ़ ही है। हाईकोर्ट भी पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट कहलाता है। न राजधानी अपनी, न हाईकोर्ट अपना और न ही सतलुज, यमुना संपर्क नहर में पानी अपना, इसमें सफलता हाथ नहीं लगी। हां, दोनों राज्यों के लिए चुनावी मुद्दा जरूर बना हुआ है। यहां तक कि इस नहर में पंजाब की ओर से मिट्टी डालकर पाटने का काम शुरू हो गया था। न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी। 

 

हरियाणा में स्वर्ण जयंती समारोहों पर 1700 करोड़ रुपए के खर्च पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सफाई दी है कि यह सारा पैसा वर्ष भर चलने वाले समारोहों पर नहीं बल्कि विकास कार्यों पर भी खर्च किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो और बजट बढ़ा दिया जाएगा। कांग्रेस ने इंदिरा गांधी की स्मृति में वर्ष भर एकता यात्रा चलाने का कार्यक्रम घोषित किया है और विपक्ष के नेता अभय चौटाला ने कहा है कि यदि स्वर्ण जयंती समारोह पर खर्च करने का सही प्रारूप नहीं बनाया तो इनेलो अपने स्तर पर मनाएगी स्वर्ण जयंती समारोह। 

 

इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि पर भी कांग्रेस की गुटबाजी जारी रही और एकता यात्रा कैसे निकालेंगे? अलग-अलग यात्राएं करेंगे? पूर्व मंत्री प्रो. संपत सिंह ने यह झमेला छोडक़र अलग राह निकाली। खेमेबाजी से दूर अपने आवास पर ही समर्थकों के साथ इंदिरा गांधी के चित्र पर पुष्प अर्पित पुण्यतिथि मना ली। अशोक तंवर तो दिल्ली से सिरसा पहुंचने तक रेलगाड़ी के हर रेलवे स्टेशन पर कार्यकर्ताओं को यही विश्वास दिलाते रहे कि वे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बने रहेंगे। उन्हें बदला नहीं जा रहा। आखिर सिरसा पहुंच कर गोपाल कांडा के गले लग गए। ल्यो जी, हो गया भरत मिलाप। यह भी स्वर्ण जयंती वर्ष भर चलेगा, कांग्रेस का कार्यक्रम। 

इधर पंजाब तो पहले ही पंजाब था। इसका कौन सा नया गठन हुआ था? पंजाब भी चुनाव को देखते पचास वर्ष का होने पर जश्न मना रहा है और स्वर्ण मंदिर के लिए नई-नई योजनाओं की घोषणाएं की जा रही हैं। सबसे बड़ी मजेदार बात है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को विक्रमजीत सिंह मजीठिया से मानहानि का केस झेलना पड़ रहा है। स्वर्ण जयंती समारोहों में पंजाब व हरियाणा में जश्न मनाने की होड़ लगी है। आम आदमी को क्या मिलेगा? हरियाणा में चयनित जेबीटी अध्यापकों को कब नियुक्ति मिलेगी? बर्खास्त स्वास्थ्य कर्मी बहाल होंगे और पढ़ी-लिखी महिला सरपंच पतियों से अलग पंचायतें चला सकेंगी? घूंघट हटा सकेंगी

बस एक ही बात कह सकते हैं:-

आगाज तो अच्छा है, अंजाम खुदा जाने…

लेखक परिचय

kamlesh-bhartiya

लेखक कमलेश भारतीय हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं। इससे पहले खटकड़ कलां में शहीद भगतसिंह की स्मृति में खोले सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ग्यारह साल तक हिंदी अध्यापन एवं कार्यकारी प्राचार्य।  फिर चंडीगढ से प्रकाशित दैनिक ट्रिब्यून समाचारपत्र में उपसंपादक,  इसके बाद हिसार में प्रिंसिपल रिपोर्टर ।

उसके बाद नवगठित हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष बने। कथा समय मासिक पत्रिका का संपादन। मूल रूप से पंजाब के नवांशहर दोआबा से, लेकिन फिलहाल रिहायस हिसार में। हिंदी में स्वतंत्र लेखन । दस संकलन प्रकाशित एवं एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री पुरस्कार।

स्वर्ण जयंती समारोहों के लिए तैयार हैं हम… Reviewed by on . हरियाणा और पंजाब अपने-अपने गठन के स्वर्ण जयंती वर्ष को मनाने का श्रीगणेश कर चुके हैं। पंजाब से अलग हरियाणा राज्य का गठन सन् 1966 में पहली नंवबर को किया गया था। हरियाणा और पंजाब अपने-अपने गठन के स्वर्ण जयंती वर्ष को मनाने का श्रीगणेश कर चुके हैं। पंजाब से अलग हरियाणा राज्य का गठन सन् 1966 में पहली नंवबर को किया गया था। Rating: 0

Leave a Comment

scroll to top