Sunday , 19 November 2017

किसान नै के ठाया रै

किसान नै के ठाया रै

नोटबंदी पर किसानों के दुख को व्यक्त करती डॉ रणबीर सिंह दहिया की हरियाणवी कविता - किसान नै के ठाया रै   किसान नै मनै खोल बतादे यो थारा के ठा राख्या रै।। खेती करनी मुश्किल करदी ...

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