Friday , 19 October 2018

ढाई आखर मुफ़्त के…

ढाई आखर मुफ़्त के…

व्यंग्य   इश्क़ भी ढ़ाई आखर का होता है, और मुफ्त भी ढाई आखर का। लेकिन जबसे लोगों ने दिल को 'प्रियतम का घर' के बजाए 'आवास विकास कालोनी' समझ लिया, तबसे मुफ़्त के नाम पर भीड़ ज् ...

Read More »
scroll to top