Friday , 23 February 2018

आखिरी कब तक मासूम बेटियां बलात्कार की बलि चढ़ती रहेगी।

आखिरी कब तक मासूम बेटियां बलात्कार की बलि चढ़ती रहेगी।

आखिरी कब तक मासूम बेटियां बलात्कार की बलि चढ़ती रहेगी। यौन कुंठाओ का शिकार आदमी को बनाया जा रहा है। इस सबके पिछे बाजार का बहुत बड़ा हाथ है। जिसने औरत को एक माल बना दिया है। औरत को ...

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ब से बलात्कार, ब से बीफ

ब से बलात्कार, ब से बीफ

कहते हैं जब किसी लकीर को बिना हस्तक्षेप किए छोटी करना होता है, तो उसके पास एक बड़ी लकीर और खींच दी जाती है। राजनीति में भी ठीक ऐसा ही होता है, जब किसी मुद्दे पर सरकार बैकफुट पर चल ...

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दोपदी सिंघार की कविताएं

दोपदी सिंघार की कविताएं

"कवि हूं, आदीवासी हूं, संघर्ष भरी अपनी कथा रही ।" बस ! इतना-सा परिचय और सोशल मीडिया पर समीक्षाओं-प्रशंसाओं की भरमार... आखिर क्या है ऐसा दोपदी सिंघर की रचनाओं में... आईए जानते हैं ...

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