Friday , 22 September 2017

पौष मास – पोह का म्हिना रात अंधेरी

पौष मास – पोह का म्हिना रात अंधेरी

किसान के दुख की कथा कहती यह हरियाणवी रागनी/कविता पढ़ें जिसे लिखा है डॉ रणबीर सिंह दहिया ने। पोह का म्हिना रात अन्धेरी, पड़ै जोर का पाळा सारी दुनिया सुख तैं सोवै मेरी ज्यान का गाळा ...

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किसान नै के ठाया रै

किसान नै के ठाया रै

नोटबंदी पर किसानों के दुख को व्यक्त करती डॉ रणबीर सिंह दहिया की हरियाणवी कविता - किसान नै के ठाया रै   किसान नै मनै खोल बतादे यो थारा के ठा राख्या रै।। खेती करनी मुश्किल करदी ...

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लोक कवि मान सिहं खनौरी वाले

लोक कवि मान सिहं खनौरी वाले

कहते हैं असली लोकजीवन की झलक लोककविताओं में मिलती है लेकिन हरियाणा की लोक कविता पर गाहे बगाहे इसके आरोप भी लगे हैं कि उसने पौराणिक आख्यानों के जरिये ही लोक को परिभाषित और मार्गदर् ...

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