Saturday , 21 October 2017

सुनने को फुर्सत हो तो आवाज है पत्थरों में…

सुनने को फुर्सत हो तो आवाज है पत्थरों में…

सुनने को फुर्सत हो तो आवाज है पत्थरों में उजड़ी हुई बस्तियों में आबादियां बोलती हैं कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिनका स्वरूप तो बदल जाता है मगर उससे जीवंतता नष्ट नहीं होती।  हिसार में  ...

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