Saturday , 25 November 2017

शायर-ए-मशरीक़ सर मुहम्मद इक़बाल

शायर-ए-मशरीक़ सर मुहम्मद इक़बाल

  यूनान-मिस्र-रोमा सब मिट गए जहाँ से अब तक मगर है बाक़ी नामो-निशाँ हमारा कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा देशभक्ति और राष्ट्रीय एकत ...

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