Thursday , 18 October 2018

पोंची पै के बोल्ले हरियाणवी कवि

पोंची पै के बोल्ले हरियाणवी कवि

कोई भी तीज-त्यौहार हो या फेर कोई उत्सव... म्हारे हरियाणवी कवि अपनी छाप जरूर छोडै हैं, यूं तो हरेक आदमी हर तरीयां की भावना राखैं है, पर न्यू कहया करै ‘जड़ै ना पोहंचे रवि, उड़ै पहुं ...

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