Sunday , 22 October 2017

हरियाणवी कविता – थूल्ली

हरियाणवी कविता – थूल्ली

खेल्या हामनै डंडा सौलिया कदे बगाई लाल मैं गुल्ली लुकमी चाई, पकड़म पकड़ाई भाजे-रूकगे फेर खाई थुली.... शक्कर भीजी, नुणियां घण्टी फिटो, घूते, कदे गुलर बरबंटी बिजो, बरफी, राम के खाने कद ...

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