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बैसाख – किसानों के लिये खास है यह महीना

वैशाख मास के व्रत व त्यौहार

April 20, 2017 10:56 pm by: Category: खबर खास, तीज तयोहार Leave a comment A+ / A-

बैसाख देसी साल के हिसाब तै तो साल का दूसरा महीना सै पर असल मैं किसान के चेहरे पै कुछ खुशी के सुनहरे रंग तो इसे महीनै मैं आ पावैं हैं। अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब तै 11 अप्रैल तै बैसाख का महीना शुरु हो लिया है जो 10 मई तक चालैगा।

किसानी तै जुड़े इस महीनै मैं जै ऊपर आळा गरड़-फरड़ करण लाग ज्या तो किसान का काळजा भी उसे स्पीड तै चालण लाग ज्या है। काळे बादळां नै देखकै किसानां का चेहरा सफेद पड़ ज्या है। दरअसल यू टेम गेंहू की पकी पकाई फसल की कटाई का टेम हो सै इतणै लामणी का सारा काम नहीं हो लेता किसान की मेहनत पै पाणी फिरण का खतरा भी बणा रहै सै। खैर आपां बात करां हां देसी महीने बैसाख की।

इस महीनै नै वैसाख भी कह दें हैं। अर इसे महीनै मैं पड़ै है किसानां का त्यौहार बैसाखी जो पिछाण तो पंजाब की बण रह्या है पर हरियाणा अर पंजाब भी कदे भले बखतां मैं एक होया करते जिस कारण एक दूसरे की संस्कृति नै सारे समझैं भी सैं मानैं भी सैं अर अपणा भी रहे सैं बस कुछ बातां नै छोड़ कै।

पंजाब मैं लोग बैसाखी नै मनावैं तो आपणै हरियाणैं मैं बैसाखी नै कह दे हैं मेख। मेख की एक कहावत जो गेंहू की फसल पकण की गारंटी दे सै। मेख मनाई जा है 14 अप्रैल की अर इस बारै मैं कह्या जा है के “आयी मेख आला सूखा एकम एक” मतलब यू के इस टेम गेंहू की फसल पक कै बिल्कुल त्यार हो ज्या है किसे नै जमां ए पच्छेती ला राखी हो तो न्यारी बात है पर आम तौर पै इस टेम सारी फसल जमां सही काटण जोगी होज्या है। कईयां की तो कुरड़ण भी लाग ज्या करैं अर कई सेर जो अगेती ला ले हैं उनकी तो तूड़ी लग घरां आ ले है इस टेम लग।

खैर बैसाख का महीना धार्मिक रूप तै भी ब्होत महत्वपूर्ण है। बैसाखी आळै दिन गुरु गोबिंद सिंह नै 1699 मैं पंच प्यारा तांहि अमृत का पान कराया था अर खुद भी उनके हाथां अमृत पान करया अर खालसा पंथ की नींव पड़ी। बैसाख के महीनै की षष्ठी का यू दिन था। दूसरा 13 या 14 अप्रैल नै सौर वर्ष भी शुरु होया करै क्योंकि इन दो दिनां मैं ए सूरज मेष राशि मैं दाखिल होया करै इसनै मेष संक्रांति बोल्यां करैं। देसी सालां मैं सौर वर्ष का यू पहला महीनां मान्या जा है।

वैसाख के त्यौहार

बैसाखी– बैसाख महीनै का बड़ा त्यौहार जो आम जन-जीवन तै ले कै धर्म-कर्म तै जुड़या है वैसे तो 13 अप्रैल यानि 1919 मैं जिस दिन जलियावालां मैं लोग बड़े पैमाने पै शहीद होये थे उसे दिन होया करै। 13 अप्रैल नै ए मेष संक्रांति भी है यानि नया सौर वर्ष इस दिन तै शुरु होवैगा।

गुड फ्राइडे – यू इसाईयां का त्यौहार है जिसमैं मान्या जा है के इस दिन इसा मसीह तांहि सूळी पै टांग्या गया था तो उसके बलिदान दिवस के रूप मैं यो मनाया जा है। यो शुभ शुक्रवार 14 अप्रैल नै है।

ईस्टर – ईस्टर का त्यौहार गुड फ्राइडे यानि शुक्रवार के बाद पड़ण आळे इतवार यानि रविवार नै मनाया जा है यू इस खुशी मैं क्योंकि मान्या जा है इस दिन इसा मसीह ब्होड़ कै जी उठ्या था। 16 अप्रैल नै ईस्टर का त्यौहार ईसाई लोग मनावैंगे।

वरुथिनी एकादशी – वैशाख मास की अंधेरी ग्यारस यानि कि कृष्ण एकादशी वरुथिनी एकादशी कहलाती है। एकादशी का व्रत भी राख्या जा है। ग्यास भी इसनै कह दिया करैं आस पास के तीर्थां पै पहलां बुढ़िया ब्होत न्हाण जाया करती इब का बेरा नी किसे की आसंग बच री है के नहीं। 22 अप्रैल नै यू उपवास रख्या जागा।

प्रदोष व्रत- यो दिन अंधेर की तेरहमी का है इसनै कृष्ण त्रयोदशी कह दे हैं। भोलै की पूजा भी लोग करैं हैं इस दिन।

अमावस्या व्रत – अमावस, अमवास्या मौस भी इस दिन नै कह दे हैं। पितरां खातर पिंडदान करण के इच्छुक इस दिन नै खूब मानैं हैं बाकि सूरज कै ग्रहण भी अमावस नै लाग्या करै। बैसाख अमावस्या 26 अप्रैल नै है।

अक्षय तृतीया – अक्षय तृतीया इस दिन की भी ब्होत मानता है। परशुराम जयंती इसे दिन मनाई जा है। परशुराम कै बारै मैं कह्या जा है के इननै 21 बार धरती पर तै छतरी वंश का नास करया था। त्रिदेवां मैं एक देव विष्णु के छठे अवतार भी माने जां हैं। अक्षय तृतीया नै लोग सोना भी ब्होत खराद्यां करैं। यो दिन अंग्रेजी कलैंडर कै हिसाब तै अप्रैल की 28 तारीख नै पड़ैगा।

श्री जानकी नवमी- जानकी कह्या करैं सीता नै। मान्या जा है के वैशाख महीनै के च्यांदण की नौमी नै सीता धरती मैं तै प्रकट होयी थी जो राजा जनक नै हळ चलांदी हाण मिली थी।

वैशाख पूर्णिमा व्रत– पणवासी वो दिन होया करै जिस दिन रात कै टेम चांद जमां गोळ अर बड़ा-बड़ा दिखै यानि

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