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चोटी के पीछे क्या है?

राजस्थान हरियाणा और दिल्ली में चोटी कटने की घटनाओं का सच!

August 2, 2017 10:17 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

women’s braid chopped off mystery in three state of India

बालों के नीचे चोटी चोटी के पीछे चोटी चोटी के नीचे है परांदा परांदे विच दिल अटका एक दौर में चोटी की खासियत और लोकप्रियता को बताने वाला यह गीत काफी लोकप्रिय हुआ था। आज भी ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में रामलीला मंचन हो या अन्य ड्रामा कंपनियां बतौर आइटम सोंग यह गीत अक्सर सुनाई दे जाता है। लेकिन परांदे और दिल को अपने बीच अटकाने वाली चोटी आजकल गाने की वजह से नहीं बल्कि अपने कटने को लेकर काफी चर्चा में है दरअसल चोटी कटने की अफवाहें कहें या घटनाएं दोनों ही लगातार सामने आ रही हैं। चोटी किन कारणों से किन लोगों द्वारा काटी जा रही हैं इसका खुलासा अभी नहीं हुआ है। दिल्ली से लेकर हरियाणा और राजस्थान की पुलिस इसकी खोज़बीन में लगी हुई हैं।

सैंकड़ों मामले आ चुके हैं सामने

राजस्थान से शुरु हुआ चोटी कटने का सिलसिला हरियाणा के मेवात झज्जर रोहतक गुड़गांव से होता हुआ दिल्ली में प्रवेश कर चुका है साथ ही हरियाणा के दूसरे हिस्सों में भी फैल रहा है। फतेहाबाद, हिसार में भी घटनाएं सामने आयी हैं। उत्तर प्रदेश के मथुरा और हरियाणा के ब्रज क्षेत्र पलवल में चोटी कटने से महिलाएं सहमी हैं।

क्या है वजह

इसकी वजह क्या है यह अभी तक सामने नहीं आया है लेकिन दिल्ली सहित हरियाणा और राजस्थान की पुलिस इस गुत्थी को सुलझाने को लेकर सक्रिय है। लगातार लोगों से अफवाहों पर ध्यान न दिये जाने की अपील की जा रही है। अभी तक जो मामले सामने आये हैं उनमें इक्का दुक्का मामलों को छोड़कर चोटियां अपने आप कटी हैं। चोटी कटते ही महिलाएं कुछ समय के लिये बेहोश हो जाती हैं। गुरुग्राम में एक महिला को पर चोटी काटने का आरोप लगाकर उसे पुलिस को सौंपा भी गया था बाद में जांच करने पर महिला मानसिक रूप से विक्षिप्त बताई गयी। ऐसे ही दो तीन और मामले हैं जिनमें चोटी कटने की पीड़ित भी मानसिक रूप से अस्वस्थ पाई गयी।

चोटी कटने की घटनाओं के कयास क्या हैं

चूंकि निश्चित तौर पर अभी कुछ कहा नहीं जा सकता कि ये घटनाएं क्यों हो रही हैं ऐसे में सिर्फ कयास ही लगाये जा रहे हैं। अफवाहों के बाज़ार में अलग-अलग अनुमान लग रहे हैं जैसा कि अक्सर देखने में आता है। कोई पाकिस्तान कनेक्शन ढूंढ रहा है तो इसमें बंगाल की जादू कला को देख रहा है। कोई तांत्रिकों के टोटकों को वजह बता रहा है तो कोई इसे किसी साये का कहर। लेकिन असली वजह का पता न चलना इन अफवाहों को और भी तेजी से फैला रहा है नतीजा सहमे हुए लोग सबसे ज्यादा भयभीत लंबी चोटी की मालकिन स्त्रियां, लड़कियां।

चोटी कटने के कारण क्या हो सकते हैं

अफवाहों के द्वारा जो भी कारण बताये जा रहे हैं उनमें तो रत्ती भर भी दम नहीं है। जैसा कि पहले भी इस तरह की अफवाहों का पर्दाफाश हुआ है। इससे पर्दा उठने पर भी कहानी साफ हो जायेगी। लेकिन वैज्ञानिक समझ रखने वाले समाजशास्त्रियों की नज़र में इस तरह की घटनाओं के पिछे निम्न कारण हो सकते हैं –

इस तरह की घटनाओं का वैज्ञानिक रूप से समाजशास्त्रीय समझ रखने वाले सतबीर नाग्गल कहते हैं कि ऐसे मामलों में ज्यादातार मामले व्यक्तिगत कारणों से ही अंजाम दिये जाते हैं। इसके पिछे घर वालों की उपेक्षा की शिकार महिलाएं उनका ध्यान अपनी और आकर्षित करने के लिये कर सकती हैं। कुछेक मामलों में बालों को रखने की अनिच्छा और बाल छोटे रखने की इच्छा भी हो सकती है विशेषकर छोटी लड़कियों के मामले में इस तरह की अफवाहों का फायदा उठाकर स्वयं ही इसे अंजाम दिया जा सकता है। कुल मिलाकर जिस तरह के कयास प्रचलित किये जा रहे हैं और अंधविश्वास से इन घटनाओं को जोड़कर तांत्रिक कर्म के रूप में देखा जा रहा है तो यह गलत है। इसमें रत्ती भर भी सच्चाई नहीं मिलेगी।

वहीं अमर उजाला समाचार पत्र ने इन घटनाओं पर विशेष सामग्री प्रस्तुत की है जिसमें एक मनौवैज्ञिनक ने मास हिस्टीरिया नामक रोग का जिक्र किया। अखबार ने मनोचिकित्सक प्रो. रविन्द्र पुरी के हवाले से लिखा है कि यह एक प्रकार का मानसिक रोग है जो अधिकतर महिलाओं में होता है इससे पीड़ित व्यक्ति दूसरों की बातों में जल्दी आ जाते हैं। इसके चलते बहुत सारे लोग एक जैसा व्यवहार या लक्षण ग्रहण करने लगते हैं।

देखा जाये तो ये तर्क सही भी लगते हैं इन घटनाओं में जो पकड़े गये हैं वे या तो मानसिक रूप से विक्षिप्त मिले हैं या फिर जिनकी चोटी कटी हैं उन्हें किसी ने देखा नहीं है यानि अपने आप चोटी कटने की कही जा रही है। इसके पिछे किसी की सनक, या फिर सस्ती लोकप्रियता पाने, घर वालों की तवज्जो चाहने आदि कारण ही हो सकते है। बहरहाल जो भी हो महिलाएं इन अफवाहों से इन घटनाओं से भयभीत जरूर हैं। उनका भयभीत होना एक हद तक जायज़ भी है आखिर महिलाओं को अपने लंबे बालों से प्यार जो होता है। इनकी मजबूती के लिये, लंबी और काली चोटी के लिये क्या-क्या पापड़ नहीं बेलने पड़ते। अंत में चोटी की महिमा का उल्लेख करता यह गाना काली तेरी चोटी है परांदा तेरा लाल नी, रुप दी ओ रानिये परांदे को संभाल नी किसी मनचले का तुझ पे आ गया जो दिल होगी बड़ी मुश्किल भी प्रासंगिक हो चला है। चोटी पर मनचलों का दिल आया हुआ है अपने परांदों को संभालो।

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