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विश्व मधुमेह दिवसः व्यापक जागरूकता की दरकार  

November 14, 2017 9:07 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

मधुमेह या शुगर। यानि शरीर में अग्नाश्य द्वारा इंसुलिन का स्त्राव कम होने के कारण पैदा होने वाली एक ऐसी बिमारी जिससे रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है और मरीजों में रक्त कोलेस्ट्रॉल और वसा के अवयव असामान्य हो जाते हैं। ऐसे में मरीजों की आँखों, गुर्दों, स्नायु, मस्तिष्क और  हृदय के क्षतिग्रस्त होने से इनके घातक रोगों का खतरा भी बढ़ता है।

आज विश्व में ये रोग तेजी से पांव पसार रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए सन् 1991 में अंतर्राष्ट्रीय मधुमेह संघ और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने संयुक्त रूप से इस बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए 14 नवम्बर को विश्व मधुमेह दिवस के रूप में निर्धारित किया। तभी से ये दिन हर साल 14 नवम्बर के दिन मनाया जाता है।

14 नवंबर का दिन इसलिए खास है क्योंकि इसी दिन वैज्ञानिक फ्रेडरिक बैटिंग; जिन्होनें इंसुलिन के संबंध में खोज की, का जन्म हुआ था। उन्होंने अक्टूबर, 1921 में प्रदर्शित किया कि इंसुलिन नामक तत्व शरीर में ग्लूकोज़ का निस्तारण करने में अहम भूमिका निभाता है। बैटिंग के योगदान को याद करने के लिए दुनिया के 140 देशों में मधुमेह दिवस इसी तारीख को मनाया जाता है।

हरियाणा में मधुमेह के संबंध में बात करें तो राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के पड़ोसी जिले मोटापे और मधुमेह रोगियों में सबसे आगे हैं। जिनमें टॉप के 4 जिलों में सोनीपत पहले पायदान पर है। उसके बाद करनाल, पानीपत, कैथल और फरीदाबाद का नम्बर आता है। प्रदेश की कुल 20.57 फिसदी आबादी इस बिमारी से जूझ रही है। शहरी महिलाओं के मुकाबले गांव की महिलाओं में मधुमेह ओसतन कम पाया गया है।

दुनियाभर में मधुमेह के बढते प्रभाव को देखते हुए आज भी इस संबंध में एक व्यापक जागरूकता की जरूरत है। सन् 2007 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा इस दिवस को अंगीकार करने के बाद इस का प्रतीक चिह्न नीला छल्ला चुना गया जो कि निरंतरता का प्रतीक है यानि इस बीमारी पर समुचित लगाम कसने हेतु रोगी, चिकित्सक, सामाजिक जागरूकता इत्यादि तमाम तत्वों के बीच संतुलन होना आवश्यक है।

( लेखक हरियणा खास के कंटेंट एडिटर हैं )

 

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